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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Jan 2026

    ससुर जी उवाच!

    आज मैं हिंदी के अत्यंत श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि श्री अशोक चक्रधर जी की एक   रचना शेयर कर रहा हूँ। चक्रधर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – डरते झिझकतेसहमते सकुचातेहम अपने होने वालेससुर जी के पास आए,बहुत कुछ कहना…

  • 11th Jan 2026

    उम्र भर सच ही कहा!

    उम्र भर सच ही कहा सच के सिवा कुछ न कहा,अज्र क्या इस का मिलेगा ये न सोचा हम ने| शहरयार

  • 11th Jan 2026

    एक मुद्दत से कोई!

    कौन सा क़हर ये आँखों पे हुआ है नाज़िल,एक मुद्दत से कोई ख़्वाब न देखा हम ने| शहरयार

  • 11th Jan 2026

    ख़ुद पशीमान हुए!

    ख़ुद पशीमान हुए न उसे शर्मिंदा किया,इश्क़ की वज़्अ को क्या ख़ूब निभाया हम ने| शहरयार

  • 11th Jan 2026

    ये अलग बात कि!

    सब का अहवाल वही है जो हमारा है आज,ये अलग बात कि शिकवा किया तन्हा हम ने| शहरयार

  • 11th Jan 2026

    चांदी जैसा रंग है तेरा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं क़तील शिफाई जी द्वारा लिखे गए और पंकज उधास जी के गाये हुए एक गीत का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ- चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 11th Jan 2026

    कभी कभी मेरे दिल में

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी और लता जी का गाया फिल्म कभी कभी का यह गाना प्रस्तुत कर रहा हूँ- कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 11th Jan 2026

    सन्नाटा शहर में!

    आज फिर से मेरी एक पुरानी कविता प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बेहद ठंडा है शहरी मरुथललो अब हम इसको गरमाएंगे,तोड़ेंगे जमा हुआ सन्नाटाभौंकेंगे, रैंकेंगे, गाएंगे। दड़बे में कुछ सुधार होना है,हमको ही सूत्रधार होना है,ये जो हम बुनकर फैलाते हैं,अपनी सरकार का बिछौना है।चिंतन सन्नाटा गहराता है,शब्द वमन से उसको ढाएंगे।तोड़ेंगे जमा…

  • 10th Jan 2026

    देख ली दुनिया हमने!

    जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने,इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने| शहरयार

  • 10th Jan 2026

    अब तो हर वक़्त!

    हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है,अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें| शहरयार

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