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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Jul 2024

    जहाँ दिन न होगा!

    वहाँ क़ल्ब की रौशनी साथ देगी, जहाँ दिन न होगा फ़क़त रात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    मोहब्बत बहुत बे-मज़ा!

    मोहब्बत बहुत बे-मज़ा होगी जिस दिन, ज़बाँ बे-नियाज़-ए-शिकायात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    न सावन ही बरसा!

    न सावन ही बरसा न भादों ही बरसा, बहुत शोर सुनते थे बरसात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़!

    समझती है शाम ओ सहर जिस को दुनिया, तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़ की ख़ैरात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    तारों भरी रात होगी!

    मिरे अश्क जिस शब के दामन में होंगे, यक़ीनन वो तारों भरी रात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    ज़बाँ चुप रहेगी मगर!

    निगाहों से शरह-ए-हिकायात होगी, ज़बाँ चुप रहेगी मगर बात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    सुना है कि उन से!

    सुना है कि उन से मुलाक़ात होगी, अगर हो गई तो बड़ी बात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-14

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज चौदहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा । इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने…

  • 30th Jul 2024

    पुराने शहर के लोगों में!

    पुराने शहर के लोगों में इक रस्म-ए-मुरव्वत है, हमारे पास आ जाओ कभी धोका नहीं होगा| मुनव्वर राना

  • 30th Jul 2024

    ये बेमौसम का फल है!

    हमारी दोस्ती के बीच ख़ुद-ग़र्ज़ी भी शामिल है, ये बे-मौसम का फल है ये बहुत मीठा नहीं होगा| मुनव्वर राना

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