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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Jan 2025

    दिल, मेरी कायनात अकेली है—और मैं !

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। शमशेर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयरकी हैं।                  लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की यह कविता – दिल, मेरी कायनात अकेली है—और मैं !बस अब ख़ुदा की जात अकेली है, और मैं !…

  • 18th Jan 2025

    याद में तन्हा देखूँ!

    एक इक कर के मुझे छोड़ गईं सब सखियाँ,आज मैं ख़ुद को तिरी याद में तन्हा देखूँ| परवीन शाकिर

  • 18th Jan 2025

    भूलने वाले मैं कब!

    शाम भी हो गई धुँदला गईं आँखें भी मिरी,भूलने वाले मैं कब तक तिरा रस्ता देखूँ| परवीन शाकिर

  • 18th Jan 2025

    तन्हाई का सहरा देखूँ!

    नींद आ जाए तो क्या महफ़िलें बरपा देखूँ,आँख खुल जाए तो तन्हाई का सहरा देखूँ| परवीन शाकिर

  • 18th Jan 2025

    और मैं क्या क्या देखूँ!

    अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँइक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ परवीन शाकिर

  • 18th Jan 2025

    और सिर्फ़ शाएर तू!

    ‘फ़राज़’ तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया,ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू| अहमद फ़राज़

  • 18th Jan 2025

    कंठ सभी भर्राए!

    आज मैं अपने एक मित्र और श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय श्याम निर्मम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। निर्मम जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहींकी हैं।                      लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय श्याम निर्मम जी का यह नवगीत – आँखों में सपनों की भरी नदी सूख गई,और हमें मरुथल के संग-संग बहना…

  • 17th Jan 2025

    किसी की ख़ातिर तू

    फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,जो हो सके तो चला! आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़

  • 17th Jan 2025

    क्या सोचता है आख़िर!

    हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़

  • 17th Jan 2025

    दुनिया तुझे बदल देगी!

    मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी,मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़

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