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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Jan 2025

    हवा जब चली!

    हवा जब चली फड़फड़ा कर उड़े,परिंदे पुराने महल्लात के| मुनीर नियाज़ी

  • 22nd Jan 2025

    मुझे दर्द दिल का!

    मुझे दर्द दिल का वहाँ ले गया,जहाँ दर खुले थे तिलिस्मात के| मुनीर नियाज़ी

  • 22nd Jan 2025

    छतों पर खिले फूल!

    घटा देख कर ख़ुश हुईं लड़कियाँ,छतों पर खिले फूल बरसात के| मुनीर नियाज़ी

  • 22nd Jan 2025

    हैं चर्चे अभी तक!

    जो देखे थे जादू तिरे हात के,हैं चर्चे अभी तक इसी बात के| मुनीर नियाज़ी

  • 22nd Jan 2025

    तुम मिल गए किरण से!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का यह गीत – दुख की अधीर बदली छितरा गई गगन से ।तुम मिल गए किरण से, हम खिल गए सुमन…

  • 21st Jan 2025

    मज़ा तो जब है कि!

    कटी है जिस के ख़यालों में उम्र अपनी ‘मुनीर’,मज़ा तो जब है कि उस शोख़ को पता ही न हो| मुनीर नियाज़ी

  • 21st Jan 2025

    कि मुझको देख के!

    मैं इस ख़याल से जाता नहीं वतन की तरफ़,कि मुझ को देख के उस बुत का जी बुरा ही न हो| मुनीर नियाज़ी

  • 21st Jan 2025

    पलटना चाहें वहाँ से!

    न जा कि इस से परे दश्त-ए-मर्ग हो शायद,पलटना चाहें वहाँ से तो रास्ता ही न हो| मुनीर नियाज़ी

  • 21st Jan 2025

    ये शहर जम के खड़ा!

    ज़मीं के गिर्द भी पानी ज़मीं की तह में भी,ये शहर जम के खड़ा है जो तैरता ही न हो| मुनीर नियाज़ी

  • 21st Jan 2025

    दिखाई देता है जो!

    निगाह-ए-आईना मालूम अक्स ना-मालूम,दिखाई देता है जो असल में छुपा ही न हो| मुनीर नियाज़ी

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