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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Aug 2026

    हवा भी उस को छूकर!

    मैं इंसाँ हूँ बहक जाना मिरी फ़ितरत में शामिल है,हवा भी उस को छू कर देर तक नश्शे में रहती है| मुनव्वर राना

  • 12th Aug 2026

    टाट के पर्दे में रहती है!

    अमीरी रेशम-ओ-कम-ख़्वाब में नंगी नज़र आई,ग़रीबी शान से इक टाट के पर्दे में रहती है| मुनव्वर राना

  • 12th Aug 2026

    मेरी माँ सज्दे में रहती है!

    ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है| मुनव्वर राना

  • 12th Aug 2026

    तुम्हारी याद भी लेकिन!

    बहुत जी चाहता है क़ैद-ए-जाँ से हम निकल जाएँ,तुम्हारी याद भी लेकिन इसी मलबे में रहती है| मुनव्वर राना

  • 12th Aug 2026

    कहता है जोकर सारा ज़माना!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है यह गीत- कहता है जोकर सारा ज़माना, आधी हक़ीक़त आधा फ़सानाफिल्म- मेरा नाम जोकर मुख्य कलाकार- राज कपूर, मनोज कुमार तथा अनेक कलाकार गीतकार- गोपाल दास नीरज संगीतकार- शंकर जयकिशन गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 12th Aug 2026

    कवि न कभी बूढ़ा होता है!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी हास्य कवि स्वर्गीय गोपालप्रसाद व्यास जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।व्यास जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालप्रसाद व्यास जी की यह कविता- हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !शब्दकोश में प्रिये, और भीबहुत गालियाँ मिल जाएँगीजो चाहे सो कहो, मगर…

  • 11th Aug 2026

    बुलंदी देर तक किस शख़्स के!

    बुलंदी देर तक किस शख़्स के हिस्से में रहती है,बहुत ऊँची ‘इमारत हर घड़ी ख़तरे में रहती है| मुनव्वर राना

  • 11th Aug 2026

    रेन-बसेरे थे क्या हुए!

    ऊँची इमारतें तो बड़ी शानदार हैं,लेकिन यहाँ तो रेन-बसेरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

  • 11th Aug 2026

    दो चार दिन की बात है !

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है बशीर बद्र जी की ग़ज़ल का अंतिम शेर जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया है- दो चार दिन की बात है दिल की ख़ाक में मिल जाएगा! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 11th Aug 2026

    दालान पूछते हैं कि!

    खम्बों पे ला के किस ने सितारे टिका दिए,दालान पूछते हैं कि दीवाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

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