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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Apr 2026

    कमानों में खिंचे हैं!

    कमानों में खिंचे हैं तीर तलवारें हैं चमकी,ज़रा ठहरो कहाँ जाते हो दरिया देखने को। मंज़र भोपाली

  • 7th Apr 2026

    बहेलिए

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरी कविता बहेलिए जो राजनीतिज्ञों की लालच देकर वोट पाने और उसके बाद जनता को भूल जाने की प्रवृत्ति पर आधारित है- बहेलिए – मेरी एक कविता आशा है आपको यह कविता पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 7th Apr 2026

    बहुत से आइना-ख़ाने!

    बहुत से आइना-ख़ाने हैं इस बस्ती में लेकिनतरसती है हमारी आँख चेहरा देखने को। मंज़र भोपाली

  • 7th Apr 2026

    तमाशा देखने को!

    खड़े हैं राह चलते लोग कितनी ख़ामुशी से,सड़क पर मरने वालों का तमाशा देखने को। मंज़र भोपाली

  • 7th Apr 2026

    कहीं बेखयाल होकर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं ‘तीन देवियां’ फिल्म के लिए मोहम्मद रफी जी का गाया हुआ गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ – कहीं बेखयाल होकर, यूं ही छू लिया किसी ने! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 7th Apr 2026

    कौन कहां रहता है!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कथा लेखक और कवि श्री गंगा प्रसाद विमल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। विमल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री गंगा प्रसाद विमल जी की यह कविता – कौन कहां रहता हैघर मुझमें रहता है या मैंघर मेंकौन कहां…

  • 6th Apr 2026

    गए थे शौक़ से हम!

    गए थे शौक़ से हम भी ये दुनिया देखने को, मिला हम को हमारा ही तमाशा देखने को। मंज़र भोपाली

  • 6th Apr 2026

    क्या से क्या बना डाला!

    ‘कैफ़’ तुझ को दुनिया ने क्या से क्या बना डाला,यार अब तिरे मुँह पर रंग है न पानी है। कैफ़ भोपाली

  • 6th Apr 2026

    क्या हुआ दिल-ए-ज़िंदा!

    पूछते हो क्या बाबा क्या हुआ दिल-ए-ज़िंदा,वो मिरा दिल-ए-ज़िंदा आज आँ-जहानी है। कैफ़ भोपाली

  • 6th Apr 2026

    कभी कभी मन कैसा होता है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपना एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत मेरे काव्य संकलन ‘आसमान धुनिए के छप्पर सा’ में शामिल है- कभी कभी मन कैसा होता है, कह डालूं क्या गीत सुनोगे तुम! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

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