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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Apr 2026

    न शोख़ी शोख़ है!

    न शोख़ी शोख़ है इतनी न पुरकार इतनी पुरकारी, न जाने लोग तेरी सादगी को क्या समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Apr 2026

    होश आया मोहब्बत में!

    हमारा ज़िक्र क्या हम को तो होश आया मोहब्बत में,मगर हम क़ैस का दीवाना हो जाना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Apr 2026

    वही जीना समझते हैं!

    जहाँ की फितरत-ए-बेगाना में जो कैफ़-ए-ग़म भर दें,वही जीना समझते हैं वही मरना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Apr 2026

    कहीं हों तेरे दीवाने !

    कहीं हों तेरे दीवाने ठहर जाएँ तो ज़िंदाँ है,जिधर को मुँह उठा कर चल पड़े सहरा समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Apr 2026

    ज़िंदा हैं!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपनी ग़ज़ल के कुछ शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऊपर से पर्ची नहीं आई ज़िंदा हैं! आशा है आपको पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 9th Apr 2026

    मगर ऐ दिल हम इस में!

    यही ज़िद है तो ख़ैर आँखें उठाते हैं हम उस जानिब,मगर ऐ दिल हम इस में जान का खटका समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Apr 2026

    उमीदों में भी उन की!

    उमीदों में भी उन की एक शान-ए-बे-नियाज़ी है,हर आसानी को जो दुश्वार हो जाना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Apr 2026

    मेरे देश की धरती सोना उगले!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में, देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण उपकार फिल्म का प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे महेंद्र कपूर जी ने गाया था- मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 9th Apr 2026

    अक्षरों की अर्चना!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। विराट जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की यह ग़ज़ल – आयु भर हम अक्षरों की अर्चना करते रहें.छंद में ही काव्य की नव सर्जना करते रहें..…

  • 8th Apr 2026

    शायद भेस बदला है!

    कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है, तिरे दम भर के मिल जाने को हम भी क्या समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

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