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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Apr 2026

    लहरों की तहरीरें भी!

    हिज्र के दरिया में तुम पढ़ना लहरों की तहरीरें भी, पानी की हर सत्र पे मैं कुछ दिल की बातें लिक्खूंगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 10th Apr 2026

    मैं भी रोज़ इक ख़्वाब!

    तुम भी हर शब दिया जला कर पलकों की दहलीज़ पे रखना,मैं भी रोज़ इक ख़्वाब तुम्हारे शहर की जानिब भेजूँगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 10th Apr 2026

    मैं आसमान को देखूँगा!

    अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा,जिस पर तेरा नाम लिखा है उस तारे को ढूँडूँगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 10th Apr 2026

    सहर होने को भी हम!

    ‘फ़िराक़’ इस गर्दिश-ए-अय्याम से कब काम निकला है,सहर होने को भी हम रात कट जाना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 10th Apr 2026

    ज़िंदा हैं-2

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरी ग़ज़ल के कुछ और शेर, कुछ शेर मैंने कल प्रस्तुत किए थे- आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद । ******

  • 10th Apr 2026

    न हम क़तरा समझते हैं!

    ये हस्ती नीस्ती सब मौज-ख़ेज़ी है मोहब्बत की,न हम क़तरा समझते हैं न हम दरिया समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 10th Apr 2026

    उसे सहरा समझते हैं!

    ये कह कर आबला-पा रौंदते जाते हैं काँटों को,जिसे तलवों में कर लें जज़्ब उसे सहरा समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 10th Apr 2026

    तुम आ गए हो, नूर आ गया है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, ‘आंधी’ फिल्म का लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे किशोर कुमार जी और लता मंगेशकर जी ने गाया था और गुलज़ार जी ने लिखा था-तुम आ गए हो नूर आ गया है, नहीं तो चरागों से लौ जा रही थी! आशा है आपको…

  • 10th Apr 2026

    तुझे अपना समझते हैं!

    भुला दीं एक मुद्दत की जफ़ाएँ उस ने ये कह कर,तुझे अपना समझते थे तुझे अपना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 10th Apr 2026

    किसने बाँसुरी बजाई!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। शास्त्री जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी का यह नवगीत– जनम-जनम की पहचानी वह तान कहाँ से आई !किसने बाँसुरी बजाई अंग-अंग फूले कदंब साँस झकोरे झूलेसूखी…

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