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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Apr 2026

    आज मेरे अश्कों का!

    शायद उन के दामन ने पोंछ दीं मिरी आँखें,आज मेरे अश्कों का रंग ज़ाफ़रानी है। कैफ़ भोपाली

  • 6th Apr 2026

    आँधियाँ भी पगली हैं!

    घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,आँधियाँ भी पगली हैं बर्क़ भी दिवानी है। कैफ़ भोपाली

  • 6th Apr 2026

    मंगल भवन अमंगल हारी – चौपाइयां

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत हैं मेरे स्वर में, श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां जिनको रवींद्र जैन जी के संगीत निर्देशन में ‘गीत गाता चल’ फिल्म के लिए श्री जसपाल सिंह ने गाया था- मंगल भवन अमंगल हारी – चौपाइयां आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 6th Apr 2026

    उन की राजधानी है!

    इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है,दिल नहीं मिरा गोया उन की राजधानी है। कैफ़ भोपाली

  • 6th Apr 2026

    दीवार की मरम्मत

    आज एक पुरानी पोस्ट दोहराने का दिन है। आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को पसंद नहीं करता,वह, उसके नीचे जमी…

  • 5th Apr 2026

    बूढ़े बरगद आज तुझे!

    तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक़ बे-घर लोग,बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने। कैफ़ भोपाली

  • 5th Apr 2026

    हो गई है पीर पर्बत!

    आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक बार फिर से, अपने स्वर में दुष्यंत कुमार जी की यह प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- हो गई है पीर पर्बत सी पिघलनी चाहिए! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****

  • 5th Apr 2026

    देस छुड़ाया लोगों ने!

    हम को दिवाना जान के क्या क्या ज़ुल्म न ढाया लोगों ने,दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगों ने। कैफ़ भोपाली

  • 5th Apr 2026

    रंज़िश ही सही!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर मेंअहमद फराज़ साहब की लिखी यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मेहदी हसन जी ने गाया है- रंज़िश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******

  • 5th Apr 2026

    उस पार!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता – उस पार कहीं बिजली चमकी होगीजो झलक उठा है मेरा भी आँगन ।…

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