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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Aug 2026

    आज सोचा तो आंसू भर आए!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- आज सोचा तो आंसू भर आए, मुद्दतों हो गईं मुस्कुराए !फिल्म- हँसते ज़ख्म मुख्य कलाकार- नवीन निश्चल, प्रिया राजवंशगीतकार- कैफ़ी आज़मी संगीतकार- मदन मोहन गायिका- लता मंगेशकर प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 9th Aug 2026

    एहसास की खुशबू कहाँ!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में बशीर बद्र जी की ग़ज़ल का एक और शेर जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया है –एहसास की खुशबू कहाँ आवाज के जुगनू कहाँ! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 9th Aug 2026

    घर में रह कर भी!

    एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम,घर में रह कर भी जैसे बेघर से| अज़हर इक़बाल

  • 9th Aug 2026

    अश्क भी बरसे|!

    जिस्म की आग बुझ गई लेकिन,फिर नदामत* के अश्क भी बरसे|*लज्जा अज़हर इक़बाल

  • 9th Aug 2026

    दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह अमर गीत- दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना, जहाँ नहीं चैना वहाँ नहीं रहना !फिल्म- फंटूशमुख्य कलाकार- देव आनंद, लीला चिटनिस, गीतकार- साहिर लुधियानवी संगीतकार- सचिन देव बर्मन गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 9th Aug 2026

    जब ये शब्द भी भोथरे हो जाएंगे!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री गिरिधर राठी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। राठी जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री गिरिधर राठी जी की यह कविता- चोर को कहा चोरवह डराथोड़े दिनडरा क्योंकि उस को पहचान लिया गया था चोर को कहा चोरवह ख़ुश…

  • 8th Aug 2026

    और दम घुट रहा था!

    तेरी फ़ुर्क़त का हब्स था अंदर,और दम घुट रहा था बाहर से| अज़हर इक़बाल

  • 8th Aug 2026

    मुझ को वहशत हुई!

    मुझ को वहशत हुई मिरे घर से,रात तेरी जुदाई के डर से| अज़हर इक़बाल

  • 8th Aug 2026

    गई रुतों का भला!

    नज़र की ज़द में नए फूल आ गए ‘अज़हर’,गई रुतों का भला इंतिज़ार क्या करते| अज़हर इक़बाल

  • 8th Aug 2026

    जिस पर हमारी आंख ने !

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में बशीर बद्र जी की ग़ज़ल का एक और शेर जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया है – जिस पर हमारी आंख ने मोती बिछाए रात भर! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *****

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