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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Apr 2026

    ये कहाँ की दोस्ती है!

    ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह,कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 2nd Apr 2026

    जो जिगर के पार होता!

    कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को,ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 2nd Apr 2026

    कारवां गुज़र गया-8

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है नीरज जी के लिखे, मोहम्मद रफी जी के गाये ‘नई उमर की नई फसल’ इस प्रसिद्ध का अगला भाग- कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे-8 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ********

  • 2nd Apr 2026

    तिरे वा’दे पर जिए हम!

    तिरे वा’दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना,कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए’तिबार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 2nd Apr 2026

    ये न थी हमारी क़िस्मत!

    ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 2nd Apr 2026

    हमको मन की शक्ति देना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में यह प्रार्थना प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा थ और वसंत देसाई जी के संगीत निर्देशन में गुड्डी फिल्म के लिए वाणी जयराम जी ने गाया था- हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें! आशा है आपको मेरा यह वीडिओ…

  • 2nd Apr 2026

    एक मुद्दत से मिरी!

    एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई ‘ताबिश’,मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है| अब्बास ताबिश

  • 2nd Apr 2026

    दूर कटा कवि मैं जनता का !

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता – दूर कटा कविमैं जनता का, कच-कच करताकचर रहा हूँ अपनी माटी;मिट-मिट करमैं सीख रहा हूँगतिपल जीने की परिपाटी…

  • 1st Apr 2026

    तस्दीक़ कराए जाकर!

    अपने शजरे* कि वो तस्दीक़ कराए जा कर,जिस को ज़ंजीर पहनते हुए डर लगता है|*वंश अब्बास ताबिश

  • 1st Apr 2026

    ओढ़ लेता हूँ तो सब!

    वक़्त लफ़्ज़ों से बनाई हुई चादर जैसा,ओढ़ लेता हूँ तो सब ख़्वाब हुनर लगता है| अब्बास ताबिश

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