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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Aug 2026

    घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मुक्तिबोध जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की यह कविता- घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगातेरी प्रत्यंचा का कम्पन सूनेपन का भार हरेगाहिमवत,…

  • 6th Aug 2026

    जिसे पाया नहीं उसको!

    जिसे देखा नहीं रोता हूँ उस की याद में शब-भर,जिसे पाया नहीं उस को गँवा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर

  • 6th Aug 2026

    मैं अपना अक्स पानी में!

    नहीं मिलता कहीं जब अपनी हस्ती का निशाँ मुझ को,मैं अपना अक्स पानी में बहा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर

  • 6th Aug 2026

    सोचा नहीं अच्छा बुरा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में बशीर बद्र जी की ग़ज़ल का एक शेर जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया है –सोचा नहीं अच्छा बुरा, देखा सुना कुछ भी नहीं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 6th Aug 2026

    सजा कर देख लेता हूँ!

    जिसे देखा नहीं है देख कर भी मेरी आँखों ने,मैं उस को अपने ख़्वाबों में सजा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर

  • 6th Aug 2026

    मैं अपना नाम लिखकर!

    नज़र आता नहीं जब हर्फ़ कोई लौह-ए-आलम पर,मैं अपना नाम लिख कर और मिटा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर

  • 6th Aug 2026

    दूर जाकर देख लेता हूँ!

    छुपाता है बहुत मुझ को मिरा साया मगर फिर भी,मैं ख़ुद को रौशनी से दूर जा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर

  • 6th Aug 2026

    कोई हमदम न रहा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा !फिल्म- झुमरू का गीत मुख्य कलाकार- किशोर कुमार, मधुबाला गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीतकार- किशोर कुमार गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति-श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 6th Aug 2026

    नवीन कल्पना करो!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता- निज राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिएतुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो,तुम कल्पना करो। अब…

  • 5th Aug 2026

    शक्लें बना कर देख लेता हूँ!

    बहुत बेचैन कर देती हैं जब तन्हाइयाँ घर की,दर-ओ-दीवार पर शक्लें बना कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर

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