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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Aug 2026

    रोज हम एक अंधेरी धुंध के पार!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में राहत इंदौरी जी का एक और शेर –रोज हम एक अंधेरी धुंध के पार! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 27th Aug 2026

    कैसी रुतों की सर्द हवा!

    आँखों की चमक मौहूम हुई लौ देते बदन अफ़्सुर्दा हुए,दर आई है ‘क़ैसर’ घर में मिरे ये कैसी रुतों की सर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 27th Aug 2026

    जो खेल भी चाहे खेले मगर!

    आई है घने जंगल में अभी जो खेल भी चाहे खेले मगर,कल मेरे साथ उड़ाएगी फिर सहरा सहरा गर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 27th Aug 2026

    मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिए!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में ये अमर गीत- मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिए, मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो! इस गीत की तरह ही, प्रसिद्ध अभिनेता राज कपूर जी के साथ मुकेश जी, शैलेंद्र जी और और शंकर जयकिशन की जोडी ने मिलकर भारतीय फिल्म संगीत में…

  • 27th Aug 2026

    किला!

    आज मैं श्रेष्ठ कवि श्री नंद चतुर्वेदी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्री नंद चतुर्वेदी जी की यह कविता- वह किला पूरी तरह ध्वस्त हो गया थाएक पूरे शानदार इतिहास के बावजूदवे वीरांगनाएँ आग में कूद गयी थींअपने कृतघ्न…

  • 26th Aug 2026

    जगजीत सिंह, मुकेश जी- मेरा यूट्यूब लाइव

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत हैं मेरे स्वर में लाइव प्रस्तुत जगजीत सिंह जी की ग़ज़लें और मुकेश जी के गाये कुछ गीत- आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 26th Aug 2026

    क्या बात हुई क्यूँ शहर जला!

    क्या बात हुई क्यूँ शहर जला अब इस के सिवा कुछ याद नहीं,इक फ़र्द सरापा आग हुआ पल-भर में हुआ इक फ़र्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 26th Aug 2026

    नींद पिछली सदी की ज़ख्मी है!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में राहत इंदौरी जी का एक और शेर – नींद पिछली सदी की ज़ख्मी है! आशा हौ आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 26th Aug 2026

    इक रोज़ उड़ा ले जाएगी !

    छूटे न कभी फूलों का नगर कोशिश तो यही है अपनी मगर,इक रोज़ उड़ा ले जाएगी पत्तों की तरह बे-दर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 26th Aug 2026

    लाकर ये कहाँ की गर्द हवा!

    सब अपने शनासा छोड़ गए रस्ते में हमें ग़ैरों की तरह,चेहरे पे हमारे डाल गई ला कर ये कहाँ की गर्द हवा| क़ैसर शमीम

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