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तुलना!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। दुष्यंत जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की यह कविता– गडरिए कितने सुखी हैं । न वे ऊँचे दावे करते हैंन उनको ले करएक दूसरे को…
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सोच कर इस जहाँ के बारे में!
सोच कर इस जहाँ के बारे में,ख़ुद को क्यूँ शर्मसार कर लिया जाए। राजेश रेड्डी
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उल्टे-सीधे गिरे पड़े हैं पेड़!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सूर्यभानु गुप्त जी की एक और ग़ज़ल के कुछ शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-उल्टे-सीधे गिरे पड़े हैं पेड़, रात तूफान से लड़े हैं पेड़! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। *******