Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 24th Aug 2026

    हाथ छुड़ाना भूल गया!

    चलते चलते मैं उस को घर ले आया,वो भी अपना हाथ छुड़ाना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 24th Aug 2026

    फूल बनाना भूल गया!

    ख़त लिक्खा है लेकिन ख़त के कोने पर,वो होंटों से फूल बनाना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 24th Aug 2026

    मैं जिंदगी का साथ!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया!फिल्म- हम दोनों मुख्य कलाकार- देव आनंद, साधनागीतकार- साहिर लुधियानवी संगीतकार- जयदेव गायक- मोहम्मद रफ़ी प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 24th Aug 2026

    तुझे कैसे भूल जाऊँ!

    आज मैं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। दुष्यंत जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की यह कविता – अब उम्र की ढलान उतरते हुए मुझेआती है तेरी याद‚ तुझे कैसे भूल जाऊँ। गहरा गये हैं…

  • 23rd Aug 2026

    ख़्वाब में आना भूल गया!

    आज मुझे भी उस की याद नहीं आई,वो भी मेरे ख़्वाब में आना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 23rd Aug 2026

    अच्छी भली थी दुनिया!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फाज़ली जी का एक और शेर- अच्छी भली थी दुनिया गुज़ारे के वास्ते! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 23rd Aug 2026

    दिया जलाना भूल गया!

    आज दरीचे में वो आना भूल गया,मैं भी अपना दिया जलाना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 23rd Aug 2026

    आंसू भरी हैं ये जीवन की राहें!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह अमर गीत- आंसू भरी हैं ये जीवन की राहें, कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं!फिल्म- परवरिश मुख्य कलाकार- राज कपूर, माला सिन्हा गीतकार- हसरत जयपुरीसंगीतकार- दत्ताराम गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 23rd Aug 2026

    आदमी खजूर हो गए!

    आज मैं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय तारादत्त निर्विरोध जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निर्विरोध जी की अधि करचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय तारादत्त निर्विरोध जी की यह ग़ज़ल – आदमी खजूर हो गएदूर और दूर हो गए कल मिले इनाम जो हमेंआज वो कुसूर हो गए दर्द…

  • 22nd Aug 2026

    हर घड़ी इम्तिहान होती है!

    इश्क़ की ज़िंदगी ‘हफ़ीज़’ न पूछ,हर घड़ी इम्तिहान होती है| हफ़ीज़ बनारसी

←Previous Page
1 … 33 34 35 36 37 … 1,523
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar