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धीरे रे चलो मेरी बांकी हिरनिया!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया एक शरारत भरा प्रेम गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो ‘जोहर महमूद इन गोवा’ फिल्म से है- धीरे रे चलो मेरी बांकी हिरनिया! आशा है आपको यह गीत पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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वो मेरी साँसों में दिल में !
वो मेरी साँसों में दिल में नज़र में ग़ज़लों में,मैं अपने-आप से इस को जुदा कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी
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छंद प्रसंग नहीं हैं!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा इंद्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इंद्र जी की स्नेह पाने का भी मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ था, मैंने उनकी अधिक रचनाएं शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा इंद्र जी का यह नवगीत–…
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बुरे को भला कहूँ कैसे!
ये और बात बुरे को बुरा नहीं कहता, बुरा बुरा है बुरे को भला कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी
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नाख़ुदा कहूँ कैसे!
जो कश्तियों को डुबोता है ला के साहिल पर,तुम्ही बताओ उसे नाख़ुदा कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी
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उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे!
वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे,बुरा ज़रूर है लेकिन बुरा कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी
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कौन कहता है ये कड़े हैं पेड़!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, सूर्यभानु गुप्त जी की ग़ज़ल के कुछ और शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- कौन कहता है ये कड़े हैं पेड़! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****
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चांद सी महबूबा मेरी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, ‘हिमालय की गोद में’ फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह मधुर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- चांद सी महबूबा मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******