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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Aug 2026

    कनुप्रिया-पहला गीत!

    आज मैं श्रेष्ठ संपादक, साहित्यकार एवं कवि स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी प्रसिद्ध रचना ‘कनुप्रिया’ का पहला गीत – ओ पथ के किनारे खड़े छायादार पावन अशोक-वृक्षतुम यह क्यों कहते हो…

  • 26th Aug 2026

    रुक जा ओ जाने वाली रुक जा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- रुक जा ओ जाने वाली रुक जा, मैं तो राही तेरी मंज़िल का! फिल्म- कन्हैया मुख्य कलाकार- राज कपूर, नूतन गीतकार- शैलेन्द्रसंगीतकार- शंकर जयकिशन गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 25th Aug 2026

    हौसले जिंदगी के देखते हैं!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में राहत इंदौरी जी का एक शेर –हौसले जिंदगी के देखते हैं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 25th Aug 2026

    रहती है हमेशा ज़र्द हवा!

    मौसम तो बदलते हैं लेकिन क्या गर्म हवा क्या सर्द हवा,ऐ दोस्त हमारे आँगन में रहती है हमेशा ज़र्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 25th Aug 2026

    मैं उस को वो मुझे !

    धूप चढ़े तक दोनों घर में सोए रहे,मैं उस को वो मुझे जगाना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 25th Aug 2026

    उडें जब जब जुल्फों तेरी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- उडें जब जब जुल्फों तेरी कंवारियों का दिल मचले!फिल्म- नया दौर मुख्य कलाकार- दिलीप कुमार, वैजयंती माला गीतकार- साहिर लुधियानवी संगीतकार- ओ. पी. नैयर गायक- मोहम्मद रफी, आशा भोसले प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 25th Aug 2026

    दायरा!

    आज मैं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय धनंजय वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धनंजय वर्मा जी की यह कविता – टे से कमरे मेंएकरसता सेऊब जब जाता हूँयहाँ की कुर्सी वहाँवहाँ का सामाँ यहाँरख लेता हूँ । इस पे भी…

  • 24th Aug 2026

    फूल खिलाना भूल गया!

    बेलें दीवारों से लिपटना भूल गईं,मौसम अपने फूल खिलाना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 24th Aug 2026

    मुझे मनाना भूल गया!

    रूठ कर इक बिस्तर पे दोनों बैठे रहे,मैं उस को वो मुझे मनाना भूल गया| नज़ीर क़ैसर

  • 24th Aug 2026

    जंगल में दूर दूर तक!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फाजली जी की ग़ज़ल का यह अंतिम शेर – जंगल में दूर दूर तक दुश्मन न कोई दोस्त! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

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