जो खेल भी चाहे खेले मगर!

आई है घने जंगल में अभी जो खेल भी चाहे खेले मगर,
कल मेरे साथ उड़ाएगी फिर सहरा सहरा गर्द हवा|

क़ैसर शमीम

2 responses to “जो खेल भी चाहे खेले मगर!”

  1. Wah wah.. bahut khoob😍

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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