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यादों की कहानी है!
दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है,शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है| बशीर बद्र
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क्या जान गँवानी है!
इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र
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काफिला आवाज़ का!
आज मैं हिंदी नवगीत विधा के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा इंद्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इंद्र जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे स्वर्गीय इंद्र जी का भरपूर स्नेह प्राप्त हुआ था। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा इंद्र जी का…
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आँसू कभी शीशा है!
ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल, आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है| बशीर बद्र
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ये मुल्क-ए-जवानी है!
ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है,ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है| बशीर बद्र
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ठहरा हुआ दरिया है!
दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है,ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र
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ग़म में वो रवानी है!
पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है,ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र
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यहाँ से तेरे मिरे!
ये एक पेड़ है आ इस से मिल के रो लें हम,यहाँ से तेरे मिरे रास्ते बदलते हैं| बशीर बद्र