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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Jun 2025

    आम रस्ता नहीं था मैं!

    आम रस्ता नहीं था मैं, फिर भी,मुझसे हो कर गुज़र गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    एक रिमझिम में!

    एक रिमझिम में बस, घड़ी भर की,दूर तक तर-ब-तर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    घर गया कोई!

    दिल में ऐसे उतर गया कोई,जैसे अपने ही घर गया कोई| सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    प्यास से मर रही !

    प्यास से मर रही है ये दुनिया,और पीने को, बस, रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    छतरियाँ तान लें !

    छतरियाँ तान लें जो पानी हो,आसमाँ से बरस रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    तार पर तार!

    सौ दुखों का सितार हर चेहरा,तार पर तार कस रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    डस रहा है ख़ून!

    गाँव में एक भी नहीं ओझाऔर लोगों को डस रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    क़ैद इतने बरस !

    क़ैद इतने बरस रहा है ख़ून,छूटने को तरस रहा है ख़ून। सूर्यभानु गुप्त

  • 16th Jun 2025

    प्रकृति संदेश!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक बाल कविता शेयर कर रहा हूँ| द्विवेदी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोहन लाल द्विवेदी जी की यह कविता – पर्वत कहता शीश उठाकर,तुम भी ऊँचे बन जाओ।सागर कहता है लहराकर,मन में गहराई…

  • 15th Jun 2025

    ज़ंजीर पहनाई गई!

    जुरअत-ए-इंसाँ पे गो तादीब के पहरे रहे,फ़ितरत-ए-इंसाँ को कब ज़ंजीर पहनाई गई| साहिर लुधियानवी

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