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अगर ये तुम ने कहा!
किसे मजाल कहे कोई मुझ को दीवाना,अगर ये तुम ने कहा है तो कोई बात नहीं| राज़ इलाहाबादी
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तुम्ही ने तोड़ दिया है!
तुम्ही ने आइना-ए-दिल मिरा बनाया था,तुम्ही ने तोड़ दिया है तो कोई बात नहीं| राज़ इलाहाबादी
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जहाँ ने छोड़ दिया है!
ये फ़िक्र है कहीं तुम भी न साथ छोड़ चलो,जहाँ ने छोड़ दिया है तो कोई बात नहीं| राज़ इलाहाबादी
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सफ़ीना डूब रहा है!
यही बहुत है कि तुम देखते हो साहिल से,सफ़ीना डूब रहा है तो कोई बात नहीं| राज़ इलाहाबादी
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यही वफ़ा का सिला है!
यही वफ़ा का सिला है तो कोई बात नहीं,ये दर्द तुम ने दिया है तो कोई बात नहीं| राज़ इलाहाबादी
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खेल ज्वाला से किया है!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की यह कविता – खेल ज्वाला से किया है! शून्यता जब नयन छाई, हृदय में तृष्णा समाई, समझ कर पीयूष…