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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Sep 2025

    दीवाना बने फिरते थे!

    वो भी क्या दिन थे कि दीवाना बने फिरते थे,सुन लिया था तिरे बारे में कहीं से हम ने| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Sep 2025

    कितनी शिकनों को!

    हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने,कितनी शिकनों को चुना तेरी जबीं से हम ने| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Sep 2025

    बात करेंगे हम तो मन की!

    आज प्रस्तुत है एक नवगीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बात करेंगे हम तो मन की गीत कहो, नवगीत कहो तुम, या प्रलाप की रीत कहो तुम, हम को कहते ही रहना है, धारा सा अविरल बहना है। हम मन की गिरहें खोलेंगे धूप दिखाएंगे जीवन की। मन ही है, संपत्ति हमारी सहता सभी विपत्ति…

  • 14th Sep 2025

    उन की ख़ुशी मुझे!

    राज़ी हों या ख़फ़ा हों वो जो कुछ भी हों ‘शकील’,हर हाल में क़ुबूल है उन की ख़ुशी मुझे| शकील बदायूनी

  • 14th Sep 2025

    इक शय मिली है!

    पाया है सब ने दिल मगर इस दिल के बावजूद,इक शय मिली है दिल में खटकती हुई मुझे| शकील बदायूनी

  • 14th Sep 2025

    मिरी तिश्ना-लबी मुझे!

    रखना है तिश्ना-काम तो साक़ी बस इक नज़र,सैराब कर न दे मिरी तिश्ना-लबी मुझे| शकील बदायूनी

  • 14th Sep 2025

    यूँ दीजिए फ़रेब!

    यूँ दीजिए फ़रेब-ए-मोहब्बत कि उम्र भर,मैं ज़िंदगी को याद करूँ ज़िंदगी मुझे| शकील बदायूनी

  • 14th Sep 2025

    यूँ बन रहा हूँ जैसे!

    रोने पे अपने उन को भी अफ़्सुर्दा देख कर,यूँ बन रहा हूँ जैसे अब आई हँसी मुझे| शकील बदायूनी

  • 14th Sep 2025

    न ग़म की ख़ुशी मुझे!

    अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे,बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे| शकील बदायूनी

  • 14th Sep 2025

    फिर आया हिंदी दिवस!

    और आज आ गया है 14, सितंबर अर्थात ‘हिंदी दिवस’। इस दिवस की शुभकामनाएं, यदि इस दिन से हिंदी को कुछ मिला है! एक घोषणा हुई थी ‘हिंदी’ को राजभाषा बनाने, ढेर सारे किंतु-परंतु के साथ। बस यही है कि रिपोर्टें तैयार होती रहेंगी और हिंदी जहाँ थी, वहीं है। हिंदी को अगर आगे बढ़ाया…

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