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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Sep 2025

    इसी ज़मीं की अमानत!

    इसी ज़मीन में इक दिन मुझे भी सोना है,इसी ज़मीं की अमानत हैं मेरे प्यारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Sep 2025

    यही तो एक हवाला है!

    यही तो एक हवाला है मेरे होने का,यही गिराती है मुझ को यही उतारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Sep 2025

    सपने हमारे!

    प्रस्तुत है आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- सपनों की अलग ही दुनिया हैनिराली, नशीलीभयावह भी होती है कभी! एक अलग दुनिया है वोलेकिन उसका आधार हमारी ज़िंदगी में ही है, हमारी कामनाएं, हमारे भयवे ही सृजन करते हैंहमारे सपनों का। जैसे सायास हम रचते हैं कविता, वैसे ही कामनाओं और आशंकाओं मेंउलझा…

  • 12th Sep 2025

    सफ़र में साथ रहे!

    प जैसे रेल में दो अजनबी मुसाफ़िर हों,सफ़र में साथ रहे यूँ तो हम तुम्हारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 12th Sep 2025

    बड़े सुकून से डूबे थे!

    बड़े सुकून से डूबे थे डूबने वाले,जो साहिलों पे खड़े थे बहुत पुकारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 12th Sep 2025

    चलते हैं दो किनारे भी!

    सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसे,हमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 12th Sep 2025

    ये ज़िंदगी है यहाँ !

    ये ज़िंदगी है यहाँ इस तरह ही होता है,सभी ने बोझ से लादे हैं कुछ उतारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 12th Sep 2025

    थे ख़्वाब एक हमारे भी!

    थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी,पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 12th Sep 2025

    कपड़ों में हैं नंगे लोग!

    दौर-ए-हाज़िर में ‘जावेद’,कपड़ों में हैं नंगे लोग| मालिकज़ादा जावेद

  • 12th Sep 2025

    महँगे घर में रहते हैं!

    महँगे घर में रहते हैं,बर्फ़ के जैसे ठंडे लोग| मालिकज़ादा जावेद

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