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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Jun 2025

    अब तो ये बातें भी!

    उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ,अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गईं आई गई| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    कैसे कैसे पैकरों की

    कैसे कैसे चश्म ओ आरिज़ गर्द-ए-ग़म से बुझ गए,कैसे कैसे पैकरों की शान-ए-ज़ेबाई गई| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    अच्छा चलो यूँ ही सही!

    हम करें तर्क-ए-वफ़ा अच्छा चलो यूँ ही सही,और अगर तर्क-ए-वफ़ा से भी न रुस्वाई गई| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    ऐ ग़म-ए-दुनिया!

    ऐ ग़म-ए-दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते,किन बहानों से तबीअ’त राह पर लाई गई| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    बिक गए जब तेरे लब!

    बिक गए जब तेरे लब फिर तुझ को क्या शिकवा अगर,ज़िंदगानी बादा ओ साग़र से बहलाई गई| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    दिन तेरे सोगवारों के!

    शुग़्ल-ए-मय-परस्ती गो जश्न-ए-ना-मुरादी था,यूँ भी कट गए कुछ दिन तेरे सोगवारों के| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    पैरहन घटाओं के!

    तुम ने सिर्फ़ चाहा है हम ने छू के देखे हैं,पैरहन घटाओं के जिस्म बर्क़-पारों के| साहिर लुधियानवी

  • 15th Jun 2025

    कठोर दयालुता- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 14th Jun 2025

    अजनबी दयारों के!

    पहले हँस के मिलते हैं फिर नज़र चुराते हैं, आश्ना-सिफ़त हैं लोग अजनबी दयारों के| साहिर लुधियानवी

  • 14th Jun 2025

    गेसुओं की छाँव में!

    गेसुओं की छाँव में दिल-नवाज़ चेहरे हैं,या हसीं धुँदलकों में फूल हैं बहारों के| साहिर लुधियानवी

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