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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Apr 2025

    दर-ब-दर हो जाऊँ!

    मैं इस से पहले कि बिखरूँ इधर उधर हो जाऊँ,मुझे सँभाल ले मुमकिन है दर-ब-दर हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 7th Apr 2025

    तुम ने जो तोड़ दिए!

    तुम ने जो तोड़ दिए ख़्वाब हम उन के बदले,कोई क़ीमत कभी लेते तो ख़ुदाई लेते| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2025

    अँधेरों से कमाई लेते!

    चाँद रातों में हमें डसता है दिन में सूरज,शर्म आती है अँधेरों से कमाई लेते| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2025

    हमदर्दों का ये दर्द!

    कितना मानूस सा हमदर्दों का ये दर्द रहा,इश्क़ कुछ रोग नहीं था जो दवाई लेते| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2025

    पेड़!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय धनंजय वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धनंजय वर्मा जी की यह कविता – रास्ते का पेड़दुपहरिया में तपपत्तियों की ताल पेझुमक झूम झूमर गीत गाता है । राह का थकाहर मुसाफिरतने…

  • 6th Apr 2025

    बर्फ़ की तरह दिसम्बर

    बर्फ़ की तरह दिसम्बर का सफ़र होता है, हम उसे साथ न लेते तो रज़ाई लेते| राहत इंदौरी

  • 6th Apr 2025

    लोग क्यूँ आग!

    आबले अपने ही अँगारों के ताज़ा हैं अभी,लोग क्यूँ आग हथेली पे पराई लेते| राहत इंदौरी

  • 6th Apr 2025

    एक सच के लिए!

    बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते,एक सच के लिए किस किस से बुराई लेते| राहत इंदौरी

  • 6th Apr 2025

    ख़ाली कई मकान पड़े!

    किसी मकीन की आमद के इंतिज़ार में हैं,मिरे मोहल्ले में ख़ाली कई मकान पड़े| राहत इंदौरी

  • 6th Apr 2025

    उठे हैं हाथ मिरे!

    उठे हैं हाथ मिरे हुर्मत-ए-ज़मीं के लिए.मज़ा जब आए कि अब पाँव आसमान पड़े| राहत इंदौरी

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