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ज़िंदगी बोझ बनी हो!
बोझ होता जो ग़मों का तो उठा भी लेते,ज़िंदगी बोझ बनी हो तो उठाएँ कैसे| नक़्श लायलपुरी
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बात यह अनर्गल है!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरी एक छोटी सी कविता –बात यह अनर्गल है! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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दर्द में डूबे हुए नग़्मे!
दर्द में डूबे हुए नग़्मे हज़ारों हैं मगर,साज़-ए-दिल टूट गया हो तो सुनाएँ कैसे| नक़्श लायलपुरी
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हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फर्ज़ फिल्म का प्रसिद्ध गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी ने इसका संगीत तैयार किया था और लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने यह गीत गाया था-हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने,…
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दीवार गिराएँ कैसे!
दिल की राहों में उठाते हैं जो दुनिया वाले,कोई कह दे कि वो दीवार गिराएँ कैसे| नक़्श लायलपुरी
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एक पैगाम आकाश के नाम!
आज श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री सुश्री नीलम सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री नीलम सिंह जी की यह कविता – आकाश !कब तक ओढ़ोगेपरंपरा की पुरानी चादर,ढोते रहोगेव्यापक होने का झूठा दंभ, तुम्हारा उद्देश्यहीन विस्तारनहीं ढक सका हैकिसी का…
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मन को बचाएँ कैसे!
रस्म-ए-उल्फ़त को निभाएँ तो निभाएँ कैसे, हर तरफ़ आग है दामन को बचाएँ कैसे| नक़्श लायलपुरी
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ज़िंदगी की बेबसी का!
एक मुश्त-ए-ख़ाक और वो भी हवा की ज़द में है,ज़िंदगी की बेबसी का इस्तिआ’रा देखना| परवीन शाकिर
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जाने अब क्या क्या!
आइने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिए,जाने अब क्या क्या दिखाएगा तुम्हारा देखना| परवीन शाकिर
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सूनी सड़कों पर ये आवारा पांव!
अॅपॅणे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में डॉक्टर धर्मवीर भारती जी का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- सूनी सड़कों पर ये आवारा पांव, माथे पर टूटे नक्षत्रों की छांव, कब तक आखिर कब तक! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******