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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Sep 2026

    बदला मिरे हमराज़ का रंग!

    यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग,यूँ फ़ज़ा महकी कि बदला मिरे हमराज़ का रंग| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 10th Sep 2026

    झुकी झुकी सी नज़र!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में कैफ़ी आज़मी जी का शेर – झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं!फिल्म- अर्थ मुख्य कलाकार- शबाना आज़मी, राज किरण शायर- कैफ़ी आज़मी गायक- जगजीत सिंह प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 10th Sep 2026

    साहिर लुधियानवी जी के गीत!

    मेरे यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के माध्यम से प्रस्तुत है साहिर लुधियानवी जी के संबंध में चर्चा और उनके लिखे गीतों की एक झलक- साहिर लुधियानवी जी के लिखे फिल्मी गीत आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद ******

  • 10th Sep 2026

    हर इक गाम ज़िंदगी!

    हर इक क़दम अजल था हर इक गाम ज़िंदगी,हम घूम फिर के कूचा-ए-क़ातिल से आए हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 10th Sep 2026

    ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं हम क्या करें!फिल्म- इज्ज़त मुख्य कलाकार- धर्मेंद्र, तनुजा गीतकार- साहिर लुधियानवी संगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल गायक- लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 10th Sep 2026

    किला!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री नंद चतुर्वेदी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है श्री नंद चतुर्वेदी जी की यह कविता- वह किला पूरी तरह ध्वस्त हो गया थाएक पूरे शानदार इतिहास के बावजूदवे वीरांगनाएँ आग में कूद गयी थींअपने कृतघ्न और…

  • 9th Sep 2026

    किस दिल से आए हैं!

    उठ कर तो आ गए हैं तिरी बज़्म से मगर,कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आए हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Sep 2026

    तिरी महफ़िल से आए हैं!

    शम-ए-नज़र ख़याल के अंजुम जिगर के दाग़,जितने चराग़ हैं तिरी महफ़िल से आए हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Sep 2026

    इश्क़ में और कुछ!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में पंकज उधास जी की गायी ग़ज़ल का आखिरी शेर-इश्क़ में और कुछ नहीं मिलता! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 9th Sep 2026

    सब क़त्ल हो के तेरे !

    सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं,हम लोग सुर्ख़-रू हैं कि मंज़िल से आए हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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