तिरी महफ़िल से आए हैं!

शम-ए-नज़र ख़याल के अंजुम जिगर के दाग़,
जितने चराग़ हैं तिरी महफ़िल से आए हैं|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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