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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Sep 2026

    जगजीत सिंह जी की गायी कुछ ग़ज़लें!

    मेरे यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के माध्यम से प्रस्तुत हैं जगजीत सिंह जी की गायी ग़ज़लों की कुछ झलकियां- आशा है आपको ये प्रस्तुति पसंद आएगीधन्यवाद। *****

  • 9th Sep 2026

    मैं शराबी!

    आज की रचना- ऐसा लगा कि किसी आत्मा ने मेरे भीतर प्रवेश किया और मुझसे अपने बारे में यह कविता लिखवा ली, जैसी है प्रस्तुत है – हाल जर्जर चाल बदतर आंख में डोरे गुलाबी मैं शराबी. जो कमाया फूंक डाला बहुत लोगों ने संभाला किंतु आखिर हो गया अब दूर हाथों से निवाला खो…

  • 8th Sep 2026

    तलत महमूद जी, मुकेश जी

    अपने यूट्यूब चैनल लाइव रील के अंतर्गत मैं तलत महमूद जी के कुछ गीतों की झलकियां और मुकेश जी के दो गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद *****

  • 8th Sep 2026

    जुल्म सहकर जो!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में पंकज उधास जी का गाया एक और शेर –जुल्म सहकर जो उफ़ नहीं करते! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ****

  • 8th Sep 2026

    हवा-ए-वक़्त ज़रा!

    हवा-ए-वक़्त ज़रा पैरहन की ख़ैर मना,ये मत समझ कि परिंदों में जान कुछ कम है| मंज़र भोपाली

  • 8th Sep 2026

    मगर वो कहते हैं!

    इधर तो दर्द का प्याला छलकने वाला है,मगर वो कहते हैं ये दास्तान कुछ कम है| मंज़र भोपाली

  • 8th Sep 2026

    अभी शुमार के क़ाबिल!

    अभी शुमार के क़ाबिल हैं ज़ख़्म-ए-दिल मेरे,अभी वो दुश्मन-ए-जाँ मेहरबान कुछ कम है| मंज़र भोपाली

  • 8th Sep 2026

    चलते चलते मेरे ये गीत

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना !मुख्य कलाकार- सिमी ग्रेवाल, विशाल आनंद गीतकार- अमित खन्ना संगीतकार- बप्पी लाहिरीगायक- किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 8th Sep 2026

    कभी जब याद आ जाते!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा समीक्षक स्वर्गीय नामवर सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नामवर सिंह जी का यह नवगीत – कभी जब याद आ जाते नयन को घेर लेते घन,स्वयं में रह न पाता मनलहर से मूक अधरों…

  • 7th Sep 2026

    बना रहा है फ़लक भी!

    बना रहा है फ़लक भी अज़ाब मेरे लिए,तेरी ज़मीन पे क्या इम्तिहान कुछ कम है| मंज़र भोपाली

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