बना रहा है फ़लक भी अज़ाब मेरे लिए,
तेरी ज़मीन पे क्या इम्तिहान कुछ कम है|
मंज़र भोपाली
बना रहा है फ़लक भी!
One response to “बना रहा है फ़लक भी!”
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वाह।
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A sky full of cotton beads like clouds
वाह।
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