ख़ैर-ओ-आफ़ियत है मगर!

हमारे शहर में सब ख़ैर-ओ-आफ़ियत है मगर,
यही कमी है कि अम्न-ओ-अमान कुछ कम है|

मंज़र भोपाली

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