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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Apr 2026

    सूरज को साया दे!

    रहने दे जलती धरती,तू सूरज को साया दे| शीन काफ़ निज़ाम

  • 21st Apr 2026

    अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में श्री सुदर्शन फाकिर जी की यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जग्जीत सिंह-चित्रा सिंह ने बहुत खूबसूरत तरीके से गाया है- अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें,हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें! आशा है आपको यह प्रस्तुति पसंद आएगी,धन्यवाद । *****

  • 21st Apr 2026

    गीत उगने दो

    आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मौन यूं कवि मत रहो,अब गीत उगने दो। अनुभव की दुनिया केअनगिनत पड़ाव,आसपास से गुज़र गए,झोली में भरे कभीपर फिर अनजाने में,सभी पत्र-पुष्प झर गए,करके निर्बंध, पिपासे मानव-मन को-अनुभव-संवेदन दाना चुगने दो। खुद से खुद की बातेंकरने से क्या होगा,सबसे, सबकी…

  • 20th Apr 2026

    मेरा सहरा दे!

    लौटा ले अपनी बस्ती, मुझ को मेरा सहरा दे| शीन काफ़ निज़ाम

  • 20th Apr 2026

    आँखें दे आईना दे!

    आँखें दे आईना दे,लेकिन पहले चेहरा दे| शीन काफ़ निज़ाम

  • 20th Apr 2026

    तू क्यूँ चराग़ ले के!

    मैं पूछता हूँ तुझ को ज़रूरत थी क्या ‘निज़ाम’,तू क्यूँ चराग़ ले के अँधेरे के घर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 20th Apr 2026

    क्या बतलाएं हमने कैसे!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी की एक ग़ज़ल के दो शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-क्या बतलाएं हमने कैसे सांझ-सवेरे देखे हैं! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****

  • 20th Apr 2026

    बरसा जो अब के अब्र!

    पिछले बरस हवेली हमारी खंडर हुई,बरसा जो अब के अब्र तो समझो खंडर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 20th Apr 2026

    सूरज ही वो नहीं है!

    निकली है फ़ाल अब के अजब मेरे नाम की,सूरज ही वो नहीं है जो ढलने से डर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 20th Apr 2026

    यूं हसरतों के दाग!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म-‘अदालत’ के लिए लता मंगेशकर जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे राजेंद्र कृष्ण जी ने लिखा था और इसका संगीत मदन मोहन जी ने दिया था – यूं हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए, खुद दिल से दिल की बात…

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