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सितारों से भर गया!
आँसू मिरे तो मेरे ही दामन में आए थे,आकाश कैसे इतने सितारों से भर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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क्यूँ छोड़ कर गया!
इस फ़िक्र ही में अपनी तो गुज़री तमाम उम्र,मैं उस को था पसंद तो क्यूँ छोड़ कर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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इतना ज्यादा मत हंसना मेरे मन!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी का यह मुक्तक शेयर कर रहा हूँ- इतना ज्यादा मत हंसना मेरे मन! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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आँखों में रात ख़्वाब का!
आँखों में रात ख़्वाब का ख़ंजर उतर गया,यानी सहर से पहले चराग़-ए-सहर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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ये रास्ता कोई और है!
कभी लौट आएँ तो पूछना नहीं देखना उन्हें ग़ौर से,जिन्हें रास्ते में ख़बर हुई कि ये रास्ता कोई और है| सलीम कौसर
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ऐ मेरे वतन के लोगो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में लता मंगेशकर जी का गाया कवि प्रदीप जी का लिखा प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो लता जी ने चीन से युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि स्वरूप गाया था – ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी…
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मिरा जुर्म तो कोई और था!
वही मुंसिफ़ों की रिवायतें वही फ़ैसलों की इबारतें,मिरा जुर्म तो कोई और था प मिरी सज़ा कोई और है| सलीम कौसर
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प्रार्थना की कड़ी!
आज श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार और संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता– प्रार्थना की एक अनदेखी कड़ीबाँध देती है, तुम्हारा मन, हमारा मन,फिर किसी अनजान आशीर्वाद में-डूबकरमिलती मुझे राहत…