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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Apr 2026

    नयी-नयी आँखें!

    आज भारत के महान शायर स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली जी की यह ग़ज़ल – नयी-नयी आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता हैकुछ दिन शहर में घूमे लेकिन, अब घर अच्छा…

  • 19th Apr 2026

    दुआ से असर गया!

    कोई दुआ कभी तो हमारी क़ुबूल कर, वर्ना कहेंगे लोग दुआ से असर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 19th Apr 2026

    सितारों से भर गया!

    आँसू मिरे तो मेरे ही दामन में आए थे,आकाश कैसे इतने सितारों से भर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 19th Apr 2026

    क्यूँ छोड़ कर गया!

    इस फ़िक्र ही में अपनी तो गुज़री तमाम उम्र,मैं उस को था पसंद तो क्यूँ छोड़ कर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 19th Apr 2026

    इतना ज्यादा मत हंसना मेरे मन!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी का यह मुक्तक शेयर कर रहा हूँ- इतना ज्यादा मत हंसना मेरे मन! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 19th Apr 2026

    आँखों में रात ख़्वाब का!

    आँखों में रात ख़्वाब का ख़ंजर उतर गया,यानी सहर से पहले चराग़-ए-सहर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 19th Apr 2026

    ये रास्ता कोई और है!

    कभी लौट आएँ तो पूछना नहीं देखना उन्हें ग़ौर से,जिन्हें रास्ते में ख़बर हुई कि ये रास्ता कोई और है| सलीम कौसर

  • 19th Apr 2026

    ऐ मेरे वतन के लोगो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में लता मंगेशकर जी का गाया कवि प्रदीप जी का लिखा प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो लता जी ने चीन से युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि स्वरूप गाया था – ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी…

  • 18th Apr 2026

    मिरा जुर्म तो कोई और था!

    वही मुंसिफ़ों की रिवायतें वही फ़ैसलों की इबारतें,मिरा जुर्म तो कोई और था प मिरी सज़ा कोई और है| सलीम कौसर

  • 18th Apr 2026

    प्रार्थना की कड़ी!

    आज श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार और संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता– प्रार्थना की एक अनदेखी कड़ीबाँध देती है, तुम्हारा मन, हमारा मन,फिर किसी अनजान आशीर्वाद में-डूबकरमिलती मुझे राहत…

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