तू क्यूँ चराग़ ले के!

मैं पूछता हूँ तुझ को ज़रूरत थी क्या ‘निज़ाम’,
तू क्यूँ चराग़ ले के अँधेरे के घर गया|

शीन काफ़ निज़ाम

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