एक पैगाम आकाश के नाम!

आज श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री सुश्री नीलम सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री नीलम सिंह जी की यह कविता –

आकाश !
कब तक ओढ़ोगे
परंपरा की पुरानी चादर,
ढोते रहोगे
व्यापक होने का झूठा दंभ,

तुम्हारा उद्देश्यहीन विस्तार
नहीं ढक सका है
किसी का नंगापन

छोड़कर कल्पना,
वास्तविकता पर उतर आओ,
भाई ! अपने नीले फलक पर
इन्द्रधनुष नहीं
रोटियाँ उगाओ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

Leave a comment