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राह-ए-वफ़ा में !
राह-ए-वफ़ा में फूल नहीं हैं ख़ार बहुत हैं ‘हस्ती’ जी,प्यार का दुश्मन सारा ज़माना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती
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जल रहे हैं दीप, जलती है जवानी-1
एक बार फिर से आज मैं, विख्यात हिंदी कवि स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। सुमन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की यह कविता– दीप, जिनमें स्नेहकन ढाले गए हैंवर्तिकाएँ बट बिसुध बाले…
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जिस पंछी की परवाजों में!
जिस पंछी की परवाजों में जोश-ए-जुनूँ भी शामिल हो,उस की ख़ातिर आब-ओ-दाना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती
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अपने दुख-सुख!
अपने दुख-सुख कह लेना कभी हँस लेना कभी रो लेना,तन्हाई से अपना याराना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती