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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Jan 2026

    ख़्वाब के गाँव में!

    ख़्वाब के गाँव में पले हैं हम,पानी छलनी में ले चले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    सुहानी चांदनी रातें !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का यह प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 16th Jan 2026

    त्राहि, त्राहि कर उठता जीवन!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत– त्राहि त्राहि कर उठता जीवन! जब रजनी के सूने क्षण में,तन-मन के एकाकीपन…

  • 15th Jan 2026

    आग का दरिया देखूँ!

    टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े,तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ| परवीन शाकिर

  • 15th Jan 2026

    और भी तुझ सा देखूँ!

    तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब,जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ| परवीन शाकिर

  • 15th Jan 2026

    आँखों में उतरता देखूँ!

    मैं ने जिस लम्हे को पूजा है उसे बस इक बार,ख़्वाब बन कर तिरी आँखों में उतरता देखूँ| परवीन शाकिर

  • 15th Jan 2026

    हमने तुझको प्यार किया है जितना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया फिल्म- दूल्हा-दुल्हन का यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- हमने तुझको प्यार किया है जितना, कौन करेगा इतना! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 15th Jan 2026

    फूल की तरह मिरे!

    फूल की तरह मिरे जिस्म का हर लब खुल जाए,पंखुड़ी पंखुड़ी उन होंटों का साया देखूँ| परवीन शाकिर

  • 15th Jan 2026

    क़समें वादे प्यार वफा!

    अपने यूत्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं उपकार फिल्म का यह प्रसिद्ध गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मन्ना डे साहब ने गाया था- क़समें वादे प्यार वफा सब बातें हैं बातों का क्या! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 15th Jan 2026

    सौ-सौ प्रतीक्षित पल गए!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। शेर जंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का यह नवगीत– सौ-सौ प्रतीक्षित पल गएसारे भरोसे छल गएकिरणें हमारे गाँव मेंख़ुशियाँ नहीं लाईं । महका नहीं…

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