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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Jan 2026

    देखना ये है कि!

    चाँद को छूके चले आए हैं विज्ञान के पंख,देखना ये है कि इन्सान कहाँ तक पहुँचे । गोपाल दास नीरज

  • 18th Jan 2026

    आवाज़ वहाँ तक पहुँचे!

    एक इस आस पे अब तक है मेरी बन्द जुबाँ,कल को शायद मेरी आवाज़ वहाँ तक पहुँचे । गोपाल दास नीरज

  • 18th Jan 2026

    तेरे मकाँ तक पहुँचे !

    वो न ज्ञानी ,न वो ध्यानी, न बिरहमन, न वो शेख,वो कोई और थे जो तेरे मकाँ तक पहुँचे । गोपाल दास नीरज

  • 18th Jan 2026

    ख़ामोश है सारी महफ़िल!

    इतना मालूम है, ख़ामोश है सारी महफ़िल,पर न मालूम, ये ख़ामोशी कहाँ तक पहुँचे । गोपाल दास नीरज

  • 18th Jan 2026

    अशआर मेरे यूं तो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं जां निसार अख्तर साहब की एक ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे अनूप जलोटा जी ने भी गाया है- अशआर मेरे यूं तो ज़माने के लिए हैं! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *******

  • 18th Jan 2026

    हम तेरी चाह में!

    हम तेरी चाह में, ऐ यार ! वहाँ तक पहुँचे ।होश ये भी न जहाँ है कि कहाँ तक पहुँचे । गोपाल दास नीरज

  • 18th Jan 2026

    वो ज़िंदगी अब कहीं नहीं है!

    तुम अपने क़स्बों में जा के देखो वहाँ भी अब शहर ही बसे हैं,कि ढूँढते हो जो ज़िंदगी तुम वो ज़िंदगी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 18th Jan 2026

    हमने अपना सब कुछ खोया !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म-सरस्वतीचंद्र का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी ने गाया था- हमने अपना सब कुछ खोया प्यार तेरा पाने को! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 18th Jan 2026

    हम तो मस्त फकीर!

    आज मैं हिंदी गीतों के राजकुंवर कहलाने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत– हम तो मस्त फकीर, हमारा कोई नहीं ठिकाना रे।जैसा अपना आना प्यारे, वैसा…

  • 17th Jan 2026

    ताज़गी अब कहीं नहीं है!

    वो आग बरसी है दोपहर में कि सारे मंज़र झुलस गए हैं,यहाँ सवेरे जो ताज़गी थी वो ताज़गी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर

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