Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 17th Jan 2026

    वरक़ पलटता हूँ मैं!

    गुज़र गया वक़्त दिल पे लिख कर न जाने कैसी अजीब बातें.वरक़ पलटता हूँ मैं जो दिल के तो सादगी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 17th Jan 2026

    वो आदमी अब कहीं नहीं है!

    बहुत दिनों बा’द पाई फ़ुर्सत तो मैं ने ख़ुद को पलट के देखा,मगर मैं पहचानता था जिस को वो आदमी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 17th Jan 2026

    बचाते हम अपनी जान!

    निगल गए सब की सब समुंदर ज़मीं बची अब कहीं नहीं है,बचाते हम अपनी जान जिस में वो कश्ती भी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 17th Jan 2026

    बुझी हुई शमअ का धुआं हूँ !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मैंने बहुत पहले कहीन सुने थे- बुझी हुई शमअ का धुआं हूँ और अपने मरकज़ पे जा रहा हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****

  • 17th Jan 2026

    ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं संगम फिल्म के लिए रफी साहब का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर कि तुम नाराज़ ना होना! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 17th Jan 2026

    सरिता!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत– यह लघु सरिता का बहता जलकितना शीतल¸ कितना निर्मल¸ हिमगिरि के हिम से निकल–निकल¸यह…

  • 16th Jan 2026

    मसअले हैं हम!

    क्यूँ हैं कब तक हैं किस की ख़ातिर हैं,बड़े संजीदा मसअले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    तू ने ढाला है और!

    तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया,तू ने ढाला है और ढले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    सफ़र की दुश्वारी!

    ख़ुद हैं अपने सफ़र की दुश्वारी,अपने पैरों के आबले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    सरकती जाए है !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, अमीर मीनाई जी की लिखी यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है- सरकती जाए है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता। आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। ******

←Previous Page
1 … 198 199 200 201 202 … 1,525
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar