Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 21st Jan 2026

    भीगती आँखों के मंज़र!

    भीगती आँखों के मंज़र नहीं देखे जाते,हम से अब इतने समुंदर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 21st Jan 2026

    दुनिया बनाने वाले !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं तीसरी क़सम फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,काहे को दुनिया बनाई। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******

  • 21st Jan 2026

    जड़ता के बावज़ूद।

    आज फिर से मेरी एक पुरानी कविता प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- जड़ता के बावज़ूद। चौराहे पर झगड़ रहे थेकुछ बदनाम चेहरे,आंखों में पुते वैमनस्य के बावज़ूदभयानक नहीं थे वे।भीड़ जुड़ीऔर करने लगी प्रतीक्षा-किसी मनोरंजक घटना की।कुछ नहीं हुआ,मुंह लटकाए भीड़धाराओं में बंटी और लुप्त हो गई।**अगले चौराहे पर,अब भी जुटी है भीड़जारी…

  • 20th Jan 2026

    ज़ुल्म और सब्र का!

    ज़ुल्म और सब्र का ये खेल मुकम्मल हो जाए, उस को ख़ंजर जो दिया है मुझे सर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 20th Jan 2026

    अगली नस्लें तो न भटकें!

    मैं तो इस ख़ाना-बदोशी में भी ख़ुश हूँ लेकिन,अगली नस्लें तो न भटकें उन्हें घर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 20th Jan 2026

    अब मैं बोलूँगा तो!

    गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था,अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 20th Jan 2026

    बादलों से सलाम लेता हूँ!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में नीरज जी के कुछ अत्यंत लोकप्रिय मुक्तक शेयर कर रहा हूँ- बादलों से सलाम लेता हूँ! आशा है आपको ये पसंद आएंगे, धन्यवाद। *****

  • 20th Jan 2026

    ज़िंदगी दी है तो!

    ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना,पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 20th Jan 2026

    गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है!

    गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रूबाई है दुखीऐसे माहौल में ‘नीरज’ को बुलाया जाए। गोपाल दास नीरज

  • 20th Jan 2026

    जब किसी से कोई गिला रखना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, निदा फाज़ली साहब की प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया था- जब किसी से कोई गिला रखना, सामने अपने आईना रखना! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। ******

←Previous Page
1 … 195 196 197 198 199 … 1,525
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar