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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Jan 2026

    बात भी इतनी कि बस!

    बात भी इतनी कि बस उस ने किया मुझ को सलाम,हाँ मगर लोगों के दिल में बद-गुमानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 22nd Jan 2026

    जाने कहाँ गए वो दिन!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- मेरा नाम जोकर, के लिए मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- जाने कहाँ गए वो दिन, कहते थे तेरी राह में नज़रों को हम बिछाएंगे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 22nd Jan 2026

    सर मिरे सीने पे !

    सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 22nd Jan 2026

    शिशु देवदूत – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 21st Jan 2026

    सुनते सुनते दास्ताँ !

    सुनते सुनते दास्ताँ सो जाएँगे सब चारागर,ख़त्म जो होगी नहीं ऐसी कहानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 21st Jan 2026

    जाते जाते वो मुझे !

    जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 21st Jan 2026

    जंग लाज़िम हो तो!

    ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा,जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 21st Jan 2026

    अब ये बिकते हुए!

    वज़’-दारी तो बुज़ुर्गों की अमानत है मगर,अब ये बिकते हुए ज़ेवर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी

  • 21st Jan 2026

    कहाँ तो तय था चरागां

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि दुष्यंत कुमार जी द्वारा आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों में से एक प्रस्तुत कर रहा हूँ, ये ग़ज़लें ‘साए में धूप’ नामक संग्रह में प्रकाशित की गई थीं- कहाँ तो तय था चरागां हर एक घर के लिए! आशा है आपको यह पसंद आएगी,…

  • 21st Jan 2026

    उस से मिलना है तो!

    उस से मिलना है तो फिर सादा-मिज़ाजी से मिलो,आईने भेस बदल कर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी

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