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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jan 2026

    दूल्हा और घोड़ी !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक बहुत पुरानी हास्य कविता का जो अंश मुझे याद है वह अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- नए नए दूल्हा थे, नई नई घोड़ी थी! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 23rd Jan 2026

    ये तो कहो कौन हो तुम!

    अपने यूफिट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं आशिक़ फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- ये तो कहो कौन हो तुम, कौन हो तुम! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवा *****

  • 23rd Jan 2026

    चुप रहेंगे नज़र झुका के!

    कभी मिलेंगे जो रास्ते में तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे,कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा तो चुप रहेंगे नज़र झुका के| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Jan 2026

    जब-जब सिर उठाया!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता– जब-जब सिर उठायाजब-जब सिर उठायाअपनी चौखट से टकराया।मस्तक पर लगी चोट,मन में उठी…

  • 22nd Jan 2026

    तुझे भुला देंगे अपने दिल से!

    तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन,न दिल को मालूम है न हम को जिएँगे कैसे तुझे भुला के| साहिर लुधियानवी

  • 22nd Jan 2026

    उमीद की बस्तियाँ बसा के!

    बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के,मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी

  • 22nd Jan 2026

    बे-मकानी दे गया!

    ले गया हमराह अपने वो मकाँ और बाम-ओ-दर,है नज़र सब कुछ मगर इक बे-मकानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 22nd Jan 2026

    फिर से जवानी दे गया!

    बज़्म में बे-पर्दा आया मुस्कुरा कर सामने,ना-तवाँ दिल को मिरे फिर से जवानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 22nd Jan 2026

    लागा चुनरी में दाग!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज में आज मैं मन्ना डे जी का गाया यह अत्यंत लोक्प्रिय गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 22nd Jan 2026

    वो मिरे अशआ’र को !

    थी ग़ज़ल मेरी बहुत बे-रब्त बे-कैफ़-ओ-असर,वो मिरे अशआ’र को अलफ़ाज़-ओ-मा’नी दे गया| नज़र कानपुरी

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