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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Oct 2025

    बातें दिल की कौन सुनेगा!

    आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बातें दिल की कौन सुनेगाहै यह बौद्धिक जन की बस्ती! दिल की बातें करने वालेलुटते जाते, पिटते जातेबहुधा अपमानित होकर भीरहते गीत प्रेम के गाते, छोडो ये झंझट अतीत केसीखो नई प्रक्रिया सस्ती। यहाँ बुद्धि व्यवहार चलेगा भावुकता को दूर भगाओजो गाने दुनिया गाती हैतुम…

  • 6th Oct 2025

    ढूँढता फिरता हूँ!

    ढूँढता फिरता हूँ यूँ अपने ही क़दमों के निशाँजैसे मुझ को मिरी नज़रों से छुपा दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 6th Oct 2025

    मेरा पता दे कोई!

    ग़रज़ इस से नहीं वो कौन है किस भेस में है,मैं कहाँ पर हूँ मुझे मेरा पता दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 6th Oct 2025

    मेरी आँखों को मिरी!

    मेरी आँखों को मिरी शक्ल दिखा दे कोई,काश मुझ को मिरा एहसास दिला दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 6th Oct 2025

    बड़ा काम नहीं है!

    ‘रौशन’ ये मोहब्बत की है दुनिया ही निराली,मिट जाना यहाँ कोई बड़ा काम नहीं है। रौशन बनारसी

  • 6th Oct 2025

    इस शाम के बा’द!

    ज़ुल्फ़ें रुख़-ए-पुर-नूर पे कहती हैं बिखर के,इस शाम के बा’द और कोई शाम नहीं है। रौशन बनारसी

  • 6th Oct 2025

    मेरे यू ट्यूब चैनल पर

    मैंने अपने यू ट्यूब चैनल पर अपनी आवाज़ में मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का एक और गीत अपलोड किया है, आज वही शेयर कर रहा हूँ- ओह रे ताल मिले नदी के जल में https://youtu.be/m_eU_UTwQ4c?si=480jSyRlIs4C20Du आशा है आपको पसन्द आएगा।

  • 6th Oct 2025

    हो दिल में मोहब्बत!

    हो दिल में मोहब्बत तो हो एहसास-ए-मोहब्बतफ़ितरत का ये इनआ’म मगर आम नहीं है। रौशन बनारसी

  • 6th Oct 2025

    किस मुँह से कहूँ !

    ये दर्द ये सोज़िश ये तड़प और ये आहें,किस मुँह से कहूँ इश्क़ में आराम नहीं है। रौशन बनारसी

  • 6th Oct 2025

    ख़बर-ए-शाम नहीं है!

    है शाम तो अब सुब्ह का होना है क़यामत,जब सुब्ह हुई तो ख़बर-ए-शाम नहीं है। रौशन बनारसी

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