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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Oct 2025

    दिल उलझता है!

    उस सितमगर की मेहरबानी से,दिल उलझता है ज़िंदगानी से| गुलज़ार देहलवी

  • 9th Oct 2025

    रेत पर नक़्श!

    रेत पर नक़्श-ए-कफ़-ए-पा नहीं रहने पाते,अहल-ए-सहरा को कोई और निशानी देना| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    यूँ जलूँ मैं कि न!

    यूँ जलूँ मैं कि न शर्मिंदा रहूँ सूरज से,और कुछ और मुझे सोख़्ता-जानी देना| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    छोटी सी ये ज़िंदगानी रे

    मेरा एक और यूट्यूब वीडिओ , मुकेश जी का गाया गीत मेरी आवाज में छोटी सी ये ज़िंदगानी रे –https://youtube.com/shorts/ppxWdPSmUHE?si=1owIYqURxejirc-Oआशा है आपको पसंद आएगाआप मेरा यूट्यूब चैनल यहाँ सब्स्क्राइब कर सकते हैं- youtube.com/kris230450 धन्यवाद

  • 9th Oct 2025

    ठहरे पानी को भी!

    कश्तियाँ देना मगर इज़्न-ए-सफ़र से पहले,ठहरे पानी को भी दरिया की रवानी देना| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    पोंछ लेना मिरी !

    पोंछ लेना मिरी पलकों से लहू की बूँदें,मिरी आँखों को अगर मंज़र-ए-सानी देना| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    अपने आँगन को नई !

    एक पौदा जो उगा है उसे पानी देना,अपने आँगन को नई रुत की कहानी देना| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    रुतों की सर्द हवा!

    आँखों की चमक मौहूम हुई लौ देते बदन अफ़्सुर्दा हुए,दर आई है ‘क़ैसर’ घर में मिरे ये कैसी रुतों की सर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    आई है घने जंगल में!

    आई है घने जंगल में अभी जो खेल भी चाहे खेले मगर,कल मेरे साथ उड़ाएगी फिर सहरा सहरा गर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 9th Oct 2025

    क्या बात हुई क्यूँ!

    क्या बात हुई क्यूँ शहर जला अब इस के सिवा कुछ याद नहीं,इक फ़र्द सरापा आग हुआ पल-भर में हुआ इक फ़र्द हवा| क़ैसर शमीम

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