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मौत ने कहा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी का यह नवगीत – फ़ोन की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया। दरवाज़े…
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ऊँची इमारतें तो!
ऊँची इमारतें तो बड़ी शानदार हैं, लेकिन यहाँ तो रेन-बसेरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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दालान पूछते हैं कि!
खम्बों पे ला के किस ने सितारे टिका दिए,दालान पूछते हैं कि दीवाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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परिंदे थे क्या हुए!
मुमकिन है कट गए हों वो मौसम की धार से,उन पर फुदकते शोख़ परिंदे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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वो क़िस्से क्या हुए!
हम से वो रत-जगों की अदा कौन ले गया,क्यूँ वो अलाव बुझ गए वो क़िस्से क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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ख़ामोश क्यूँ हो!
ख़ामोश क्यूँ हो कोई तो बोलो जवाब दो,बस्ती में चार चाँद से चेहरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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कितने हसीन लोग थे!
जिन से अँधेरी रातों में जल जाते थे दिए, कितने हसीन लोग थे क्या जाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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भूली हुई यादो मुझे इतना न सताओ
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने प्रिय गायक मुकेश जी का एक और गीत शेयर कर रहा हूँ, आशा है आपको पसंद आएगा-भूली हुई यादो मुझे इतना न सताओअब चैन से रहने दो मेरे पास न आओhttps://youtu.be/jkUtQFB8UDs?si=GVy2c5h0_vTsBeNc आप मेरे यूट्यूब चैनल को इस लिंक से सब्स्क्राइब कर सकते हैंyoutube.com/@kris230450 धन्यवाद
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डूब गया दिन!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। ओम प्रभाकर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – डूब गया दिनजब तक पहुँचे तेरे द्वारे। एक धुँधलका छाया ओर-पासधूप गाँव-बाहर की छूट गई,छप्पर-बैठक…