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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jan 2026

    उम्र भर का सहारा !

    आज आए हो तुम कल चले जाओगे ये मोहब्बत को अपनी गवारा नहीं,उम्र भर का सहारा बनो तो बनो दो घड़ी का सहारा सहारा नहीं| क़मर जलालवी

  • 28th Jan 2026

    बहेलिए!

    आज फिर से मेरी एक पुरानी कविता प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- धागे तो कच्चे हैं, मनमोहक नारों के,लेकिन जब जाल बुने जाते हैं यारों के,और ये शिकारी, डालते हैं दाना,हर रोज़ नए वादों का,भाग्य बदल देने केजादुई इरादों का,फंसती है भोले कबूतर सी जनता तब,जाल समेट, राजनैतिक बहेलिएबांधते हैं, जन-गण की उड़ाने…

  • 27th Jan 2026

    अपना गुज़ारा नहीं!

    ऐ मिरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं, बात होती गुलों तक तो सह लेते हम अब तो काँटों पे भी हक़ हमारा नहीं| क़मर जलालवी

  • 27th Jan 2026

    ये आँसू ढूँडता है!

    ये आँसू ढूँडता है तेरा दामनमुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है। असद भोपाली

  • 27th Jan 2026

    चल गई -हास्य कविता!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं शैल चतुर्वेदी जी की प्रसिद्ध हास्य कविता ‘चल गई’ का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 27th Jan 2026

    वो सब कुछ जान कर!

    वो सब कुछ जान कर अंजान क्यूँ हैं,सुना है दिल को दिल पहचानता है। असद भोपाली

  • 27th Jan 2026

    मुक़द्दर सो गया!

    मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ,मुक़द्दर सो गया ग़म जागता है। असद भोपाली

  • 27th Jan 2026

    बाल समय रवि भक्ष लियो !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में ‘संकट मोचन हनुमान अष्टक’ का पाठ प्रस्तुत कर रहा हूँ- बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारो! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 27th Jan 2026

    वफ़ा के नाम से दिल!

    वफ़ा के नाम पर बर्बाद हो करवफ़ा के नाम से दिल काँपता है। असद भोपाली

  • 27th Jan 2026

    भोले बाबा!

    आज मैं हिंदी के वरिष्ठ नवगीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– सड़क किनारे, बित्ते भर काटूटा-फूटा खड़ा शिवालाउसमें कैसे करें गुज़ारादेवों के, असुरों के बाबा…

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