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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Jan 2026

    काल-कुएँ में गूँजती है!

    नींद में कोई अपने-आप से बातें करता रहता है,काल-कुएँ में गूँजती है आवाज़ किसी सौदाई की| गुलज़ार

  • 30th Jan 2026

    झुकी झुकी सी नज़र!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे अर्थ फिल्म के लिए जगजीत सिंह जी ने गाया था- झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

  • 30th Jan 2026

    तिनका तिनका काँटे तोड़े!

    तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की,क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की| गुलज़ार

  • 30th Jan 2026

    मैं तो था लाचार!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत– मैं तो था लाचार,प्यार ने तुमको क्यों मजबूर कर दिया?देखा चारों ओर तुम्हारेवरदानों…

  • 29th Jan 2026

    उसी बाज़ार से हैं!

    रूह से छीले हुए जिस्म जहाँ बिकते हैं, हम को भी बेच दे हम भी उसी बाज़ार से हैं| गुलज़ार

  • 29th Jan 2026

    वक़्त के तीर तो !

    वक़्त के तीर तो सीने पे सँभाले हम ने,और जो नील पड़े हैं तिरी गुफ़्तार से हैं| गुलज़ार

  • 29th Jan 2026

    उन के साए अभी!

    कल तवारीख़ में दफ़नाए गए थे जो लोग,उन के साए अभी दरवाज़ों पे बेदार से हैं| गुलज़ार

  • 29th Jan 2026

    तुम्हारे खत में !

    दाग देहलवी जी की लिखी ग़ज़ल जिसे ग़ुलाम अली जी ने गाया है उसके सिर्फ दो शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 29th Jan 2026

    चढ़ते सैलाब में!

    चढ़ते सैलाब में साहिल ने तो मुँह ढाँप लिया,लोग पानी का कफ़न लेने को तय्यार से हैं| गुलज़ार

  • 29th Jan 2026

    नाख़ुदा देख रहा है !

    नाख़ुदा देख रहा है कि मैं गिर्दाब में हूँ,और जो पुल पे खड़े लोग हैं अख़बार से हैं| गुलज़ार

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