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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Feb 2026

    धोई हुई गुलनार आँखें!

    आँच में अपनी जवानी की सुलगती चितवन,शबनम-ए-अश्क में धोई हुई गुलनार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 1st Feb 2026

    मैं हूँ बीमार-ए-ग़म!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं आपके समक्ष एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मैंने बहुत पहले अपने एक सहकर्मी से सुनी थी, मुझे शायर महोदय का नाम ज्ञात नहीं है – मैं हूँ बीमार-ए-ग़म लेकिन ऐसा नहीं! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

  • 1st Feb 2026

    नोक-ए-अबरू में!

    नोक-ए-अबरू में कभी तलख़ी-ए-इंकार लिए,कभी घोले हुए शीरीनी-ए-इक़रार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 1st Feb 2026

    बनवासी राम की तरह!

    आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- गीत पांवों से धूल झाड़कर,पिछले अनुबंध फाड़कररोज जिए हम-बनवासी राम की तरह। छूने का सुख न दे सके-रिश्तों के धुंधले एहसास,पंछी को मिले नहीं पर-उड़ने को सारा आकाश। सच की किरचें उखाड़कर,सपनों की चीरफाड़ कर,टांक लिए भ्रम,गीतों के दाम की तरह।…

  • 31st Jan 2026

    कभी झुकते हुए बादल!

    कभी झुकते हुए बादल कभी गिरती बिजली, कभी उठती हुई आमादा-ए-पैकार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 31st Jan 2026

    कभी सहमा हुआ सिमटा हुआ!

    कभी ठहरी हुई यख़-बस्ता ग़मों की झीलें,कभी सहमा हुआ सिमटा हुआ इक प्यार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 31st Jan 2026

    कभी छलकी हुई !

    कभी छलकी हुई शर्बत के कटोरों की तरह,और कभी ज़हर में डूबी हुई तलवार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 31st Jan 2026

    ग़ुंचा-ए-दिल पे !

    मौसम-ए-गुल में वो उड़ते हुए भौँरों की तरह,ग़ुंचा-ए-दिल पे वो करती हुई यलग़ार आँखें| अली सरदार जाफ़री

  • 31st Jan 2026

    अरुण यह मधुमय देश हमारा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज में महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता की कुछ पंक्तियां अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जो हमारे देश के गौरव से संबंधित हैं और उनके नाटक- चंद्रगुप्त से ली गई हैं- अरुण यह मधुमय देश हमारा! आशा है आपको यह पसंद आएंगी, धन्यवाद। *******

  • 31st Jan 2026

    बे-ज़बाँ हो के भी !

    कैफ़ियत दिल की सुनाती हुई एक एक निगाह,बे-ज़बाँ हो के भी वो माइल-ए-गुफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री

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