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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Oct 2025

    दिन फिरते हैं कब!

    देखें दिन फिरते हैं कब तक देखें फिर कब मिलते हैं,दिल से दिल आँखों से आँखें हाथ से हाथ और लब से लब| अली सरदार जाफ़री

  • 15th Oct 2025

    लहू लहू है शाम!

    ख़ंजर ख़ंजर क़ातिल अबरू दिलबर हाथ मसीहा होंट,लहू लहू है शाम-ए-तमन्ना आँसू आँसू सुब्ह-ए-तरब| अली सरदार जाफ़री

  • 15th Oct 2025

    सब मज़लूम हैं!

    जिस की तेग़ है दुनिया उस की जिस की लाठी उस की भैंस,सब क़ातिल हैं सब मक़्तूल हैं सब मज़लूम हैं ज़ालिम सब| अली सरदार जाफ़री

  • 15th Oct 2025

    शहीद वंदना- यूट्यूब चैनल पर

    आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक और अत्यंत श्रेष्ठ रचना शेयर कर रहा हूँ। आज की रचना है – शहीद वंदना और इसकी रचनाकार हैं स्वर्गीया इंदुमति कौशिक जीhttps://youtu.be/DzEXKReyEhI प्रस्तुत है यह रचना मेरे स्वर में यूट्यूब चैनल पर आशा है आपको पसंद आएगीधन्यवाद।

  • 15th Oct 2025

    अब तक ऐसा मिला!

    अब तक ऐसा मिला न कोई दिल की प्यास बुझाता जो,यूँ मय-ख़ाना-चश्म बहुत हैं बहुत हैं यूँ तो साक़ी-लब| अली सरदार जाफ़री

  • 15th Oct 2025

    दिल की दीवारें!

    प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- ये दिल की कच्ची दीवारेंकितने धक्के खाती हैं। यदि तुम करते रहे भरोसावही मिलेगा धोखा-धोखाप्रेम करो तो प्रेम मिलेगायह है सबसे बडा शिगूफा,यह प्रक्रिया नहीं रुकती हैऋतुएं आती-जाती हैं। शायद प्रेम वही शाश्वत हैजो हम प्रभु से करते हैं, बाकी रंग सभी कच्चे हैंचढ़ते…

  • 14th Oct 2025

    राम-ओ-कृष्ण-ओ!

    वेद उपनिषद पुर्ज़े पुर्ज़े गीता क़ुरआँ वरक़ वरक़,राम-ओ-कृष्ण-ओ-गौतम-ओ-यज़्दाँ ज़ख़्म-रसीदा सब के सब| अली सरदार जाफ़री

  • 14th Oct 2025

    इंसाँ इंसाँ बनेगा कब!

    वही है वहशत, वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब,इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है इंसाँ इंसाँ बनेगा कब| अली सरदार जाफ़री

  • 14th Oct 2025

    फाँसियाँ उगती रहीं!

    फाँसियाँ उगती रहीं ज़िंदाँ उभरते ही रहे,चंद दीवाने जुनूँ के ज़मज़मे गाते रहे| अली सरदार जाफ़री

  • 14th Oct 2025

    आरिज़ पे लहराते रहे!

    जिस क़दर बढ़ता गया ज़ालिम हवाओं का ख़रोश,उस के काकुल* और भी आरिज़ पे लहराते रहे|*ज़ुल्फ की लट अली सरदार जाफ़री

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