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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Oct 2025

    सुसाइड नोट!

    अक्सर हमें आत्महत्याओं के समाचार मिलते रहते हैं, हाल ही में एक उच्च पुलिस अधिकारी द्वारा आत्महत्या का समाचार मिला था, उसी की प्रतिक्रिया स्वरूप एक गीत प्रस्तुत है। प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कितना सहा दर्द जीवन मेंसाफ-साफ लिख गया! क्या मानें हम इस लेखन को कविता, गीत,…

  • 8th Oct 2025

    इक रोज़ उड़ा ले!

    छूटे न कभी फूलों का नगर कोशिश तो यही है अपनी मगर,इक रोज़ उड़ा ले जाएगी पत्तों की तरह बे-दर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 8th Oct 2025

    कहाँ की गर्द हवा!

    सब अपने शनासा छोड़ गए रस्ते में हमें ग़ैरों की तरह,चेहरे पे हमारे डाल गई ला कर ये कहाँ की गर्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 8th Oct 2025

    मौसम तो बदलते हैं!

    मौसम तो बदलते हैं लेकिन क्या गर्म हवा क्या सर्द हवा,ऐ दोस्त हमारे आँगन में रहती है हमेशा ज़र्द हवा| क़ैसर शमीम

  • 8th Oct 2025

    आ के सदा दे कोई!

    साँस रोके हुए बैठे हैं मकानों में मकींजाने कब और किसे आ के सदा दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 8th Oct 2025

    यूट्यूब पर नया गीत

    आज अपने एक और गीत का वीडिओ अपने यूट्यूब चैनल से आपके साथ शेयर कर रहा हूँ- शब्दों के पिरामिड सजाओगे-https://youtu.be/0E7psKJzVpY?si=QMDeaZ8M7RNo-KFWआशा है आपको पसंद आएगा।मेर यह भी अनुरोध है कि आप मेरे यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब करें।धन्यवाद्।

  • 8th Oct 2025

    दीवार गिरा दे कोई!

    दूसरी सम्त हैं ख़ुशबू के उफ़ुक़ की सुब्हें,रंग के कोहरे की दीवार गिरा दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 8th Oct 2025

    गीत- भोजन पांच सितारा स्थल में!

    आज प्रस्तुत है हल्के-फुल्के मूड में लिखा गया एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- भोजन पांच सितारा स्थल में! कुछ थे अतिथि खानदानी सेमौका पाकर रौब दिखातेकुछ थे वहाँ मेहरबानी सेपूर्ण सहज वे कब हो पाते सबका संगम, दावत गृह में, खाना मूल वही होता परकितने नए नाम-रूपों मेंयुवक-युवतियां वहाँ सजाते सभी खाद्य निश्चित…

  • 7th Oct 2025

    यूँ तुझे देख के!

    यूँ तुझे देख के चौंक उठती हैं सोई यादें,जैसे सन्नाटे में आवाज़ लगा दे कोई। नज़ीर क़ैसर

  • 7th Oct 2025

    तस्वीर बना दे कोई!

    दिल की तख़्ती सर-ए-बाज़ार लिए फिरता हूँ,काश इस पर तिरी तस्वीर बना दे कोई। नज़ीर क़ैसर

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