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तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी!
तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी अब भी,झूठ लिक्खें तो ये क़लम टूटे। सूर्यभानु गुप्त
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सड़क के कुत्ते!
ये जो शीर्षक दिया है मैंने वो अपने आप में एक गाली माना जाता है। पिछले दिनों बहुत जगह से ऐसी शिकायतें आई थीं कि आवारा कुत्तों ने किसी को काट लिया, जिनमें पर्यटक भी शामिल थे, कुछ मामलों में तो लोगों की मौत भी हो गई, जिसका कारण था कि कुत्तों के किसी झुंड…
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मौसम पर कविता
आज प्रस्तुत है एक कविता, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- किस मौसम पर कविता लिखेंआप ही बताओ जी। गर्मी- जब लू से झुलसकरमरते हैं लोग, जो भी हो, काम पर तो जाना हैवरना कौन देगा मजूरीवहाँ एसी, कूलर की तो बात क्यापंखा भी नहीं होता जी, जहाँ तपती धूप मेंदिहाड़ी पकानी होती है। बरसात पर…