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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Oct 2025

    अश्कों में जो पाया है!

    आज एक बार मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने स्वर में एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस गीत को साहिर लुधियानवी साहब ने लिखा था और तलत महमूद जी ने इसे गाया है। प्रस्तुत है यह गीत- आशा है आपको यह गीत पसंद आएगा।

  • 26th Oct 2025

    हमने क्या बुराई की!

    तंज़ ओ ता’ना ओ तोहमत सब हुनर हैं नासेह के, आप से कोई पूछे हम ने क्या बुराई की| अहमद फ़राज़

  • 26th Oct 2025

    खुद से कर लें बात!

    आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- पढ़ने वाला भले न कोईप्रेरित हुए भवानी जी सेलिखते रहते हम दिन-रात। पढ़कर सम्मति दे यदि कोईक्या तब अर्थ बदल जाएंगे व्यस्त सभी अपने कर्मों मेंहमको पढ़ने क्यों आएंगे, ये दुनिया तो है अपनी भीकविता में कह लेंगे हम भी निज सुख-दुख, जज़्बात।…

  • 25th Oct 2025

    कौन अब ख़बर लावे!

    तर्क कर चुके क़ासिद कू-ए-ना-मुरादाँ को, कौन अब ख़बर लावे शहर-ए-आश्नाई की| अहमद फ़राज़

  • 25th Oct 2025

    आज उनसे मजबूरन!

    तज दिया था कल जिन को हम ने तेरी चाहत में,आज उन से मजबूरन ताज़ा आश्नाई की| अहमद फ़राज़

  • 25th Oct 2025

    या तो टूट कर रोया!

    वर्ना अब तलक यूँ था ख़्वाहिशों की बारिश में,या तो टूट कर रोया या ग़ज़ल-सराई की| अहमद फ़राज़

  • 25th Oct 2025

    शिद्दतें जुदाई की!

    इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की,आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की| अहमद फ़राज़

  • 25th Oct 2025

    मैं आज ज़द पे अगर!

    मैं आज ज़द पे अगर हूँ तो ख़ुश-गुमान न हो,चराग़ सब के बुझेंगे हवा किसी की नहीं| अहमद फ़राज़

  • 25th Oct 2025

    निगाह-ए-यार मगर!

    सब अपने अपने फ़साने सुनाते जाते हैं,निगाह-ए-यार मगर हम-नवा किसी की नहीं| अहमद फ़राज़

  • 25th Oct 2025

    ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था!

    आज एक बार फिर मैं अपने यूटयूब चैनल के माध्यम से अपने स्वर में मुकेश जी की गाई हुई एक गैर फिल्मी ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ जिसके शायर है जान निसार अख्तर जी, बोल हैं- ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था, दिल ए तबाह ने भी क्या मिजाज़ पाया था लीजिए…

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