-
ख़फ़ा कर चुके हैं हम!
देखें है कौन कौन ज़रूरत नहीं रही,कू-ए-सितम में सब को ख़फ़ा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
तेरे लबों के मुक़ाबिल गुलाब क्या होगा!
आज एक बार फिर मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मुकेश जी का गाया हुआ एक गैर फिल्मी गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे शिव कुमार सरोज जी ने लिखा था। गीत के बोल हैं- तेरे लबों के मुक़ाबिल गुलाब क्या होगा! https://youtu.be/LkvY1mZxsUo आशा है आपको यह पसंद आएगा।धन्यवाद
-
समझा दे कोई जा कर
रिंदों को ‘हफ़ीज़’ इतना समझा दे कोई जा कर,आपस में लड़ोगे तुम वाइ’ज़ का भला होगा| हफ़ीज़ बनारसी
-
ऐसा है स्वभाव प्रेम का- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…
-
दीवाने से दीवाना!
फ़र्ज़ानों का क्या कहना हर बात पे लड़ते हैं,दीवाने से दीवाना शायद ही लड़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी
-
कतरा के तो जाते हो!
कतरा के तो जाते हो दीवाने के रस्ते से,दीवाना लिपट जाए क़दमों से तो क्या होगा| हफ़ीज़ बनारसी
-
चुप रहिए तो बर्बादी!
क्या तेरा मुदावा हो दर्द-ए-शब-ए-तन्हाई,चुप रहिए तो बर्बादी कहिए तो गिला होगा| हफ़ीज़ बनारसी