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अश्क पीने के लिए !
अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए,अब मिरे पास ख़ज़ाना है लुटाने के लिए| शकील जमाली
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हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में जगजीत सिंह जी और लता मंगेशकर जी की गाई, निदा फाज़ली साहब की लिखी ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ (ऑडिओ में मैंने गलती से चित्रा जी का नाम लिया था, इसके लिए क्षमा करें)- हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तनहाइयों का शिकार…
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दिन यूं बे-रंगत हुए!
आज एक नई रचना शेयर कर रहा हूँ, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा। भावों के धनुष-बाण रहे अनछुएबेमतलब ही हम अस्तंगत हुए। थे कुछ तो अपना कहलाने वालेजब-तब इस मन को बहलाने वाले ऐसे एहसास सब दिवंगत हुए। सभी दिशाएं कोई धुन गाती थींकिसी भी बहाने लिपटी जाती थींकैसे ये दिन यूं बे-रंगत हुए। नए…
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बुलाने से पहिले!
जहाँ ग़म के मारों की महफ़िल लगी हो,वहाँ बंदा हाज़िर बुलाने से पहिले। बलबीर सिंह रंग
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कबूतरी को दाना!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अल्हड बीकानेरी जी की एक छोटी सी हास्य कविता अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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मुस्कराने से पहले।
फ़लक़ की निगाहें ठहरती नहीं हैं,ये क्या कर दिया मुस्कराने से पहले। बलबीर सिंह रंग