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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Feb 2026

    कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं!

    दीवाना पूछता है ये लहरों से बार बार,कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं बताओ किधर गईं| कैफ़ी आज़मी

  • 16th Feb 2026

    हमारी जिन्दगी!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता– हमारी जिन्दगी के दिन,बड़े संघर्ष के दिन हैं।हमेशा काम करते हैं,मगर कम दाम मिलते हैं।प्रतिक्षण हम बुरे शासन–बुरे…

  • 15th Feb 2026

    जो घटाएँ गुज़र गईं!

    क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं, इस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गईं| कैफ़ी आज़मी

  • 15th Feb 2026

    सब हैं तमाशबीन!

    सब हैं तमाशबीन, लगाए हैं दूरबीन,घर फूँकने को एक भी तैयार नहीं है। शेरजंग गर्ग

  • 15th Feb 2026

    वो आईना माहौल को!

    जो आदमी की साफ़-सही शक्ल दिखा दे,वो आईना माहौल को दरकार नहीं है। शेरजंग गर्ग

  • 15th Feb 2026

    नरक पालिका!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं काका हाथरसी जी की एक छोटी सी हास्य कविता शेयर कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद! ******

  • 15th Feb 2026

    फुटपाथ की हालत !

    सुर्ख़ी में छपी है, पढ़ो मीनार की लागत,फुटपाथ की हालत से सरोकार नहीं है। शेरजंग गर्ग

  • 15th Feb 2026

    छलिया मेरा नाम!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं छलिया फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया गीत अपने स्वर में शेयर कर रहा हूँ, इस गीत को क़मर जलालाबादी जी ने लिखा था और कल्याण जी आनंद जी ने इसका संगीत दिया था- आशा है आपको यह गीत पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 15th Feb 2026

    अंतिम पर्दा – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 14th Feb 2026

    जेबों में नहीं, सिर्फ़!

    जेबों में नहीं, सिर्फ़ गरेबान में झाँको,यह दर्द का दरबार है बाज़ार नहीं है। शेरजंग गर्ग

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