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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Sep 2025

    अब कोई गिला नहीं रहा!

    यक़ीन का अगर कोई भी सिलसिला नहीं रहा,तो शुक्र कीजिए कि अब कोई गिला नहीं रहा| जावेद अख़्तर

  • 3rd Sep 2025

    मिट्टी में जब दिल!

    एक धुएँ का मर्ग़ोला सा निकला है,मिट्टी में जब दिल बोने की कोशिश की। गुलज़ार

  • 3rd Sep 2025

    उस ने मुझ को ख़त!

    नाम मिरा था और पता अपने घर का,उस ने मुझ को ख़त लिखने की कोशिश की। गुलज़ार

  • 3rd Sep 2025

    उजली सुबह के नाम पर!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री सोम ठाकुर जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। सोम ठाकुर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत- उजली सुबह के नाम परधोखे हमें बेहद मिलेसंकल्प कब पर्वत हुएकब लोग आदमकद मिले अपराध में…

  • 2nd Sep 2025

    मैंने जब तारे गिनने की!

    एक सितारा जल्दी जल्दी डूब गया,मैं ने जब तारे गिनने की कोशिश की। गुलज़ार

  • 2nd Sep 2025

    एक ही ख़्वाब ने !

    एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है,मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की। गुलज़ार

  • 2nd Sep 2025

    कितनी लम्बी ख़ामोशी!

    कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ,उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की। गुलज़ार

  • 2nd Sep 2025

    कोई न कोई रहबर!

    कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया,जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की। गुलज़ार

  • 2nd Sep 2025

    चन्द्रवर्णी रात!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुबेरनाथ राय जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुबेरनाथ राय जी की यह कविता- चन्द्रवर्णी रातगढ़ रही है काष्ठ चन्दनमॅंह-मॅंह गन्ध फैली है चन्द्रवर्णी रातछीलती है काष्ठखोलती निर्मोक वल्कलमलयगंधी मूर्ति का जोकाष्ठ के…

  • 1st Sep 2025

    रात ने मेरी जाँ लेने की!

    कल फिर चाँद का ख़ंजर घोंप के सीने मेंरात ने मेरी जाँ लेने की कोशिश की। गुलज़ार

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